कुहासा है घना देखो, जलाने आग अब आओ। रहे हो कांँपते अबतक, जरा अब तापकर जाओ।। पता पथ का नहीं[...]
Category: प्रकृति
उत्पाती वर्षा – राम किशोर पाठकउत्पाती वर्षा – राम किशोर पाठक
उत्पाती वर्षा वर्षा रानी क्रुद्ध हो, करती है उत्पात।इंद्र साथ भी दे रहे, कर भीषण वज्रपात।। बाहर खतरा है घना,[...]
नन्हा पौधानन्हा पौधा
नन्हा पौधा दादा जी ने बीज लगाया,दादी ने पानी डलवाया।चुन्नू-मुन्नू दौड़े आए,साथ में खाद भी लेकर आए। सात दिनों के[...]
प्राकृतिक आपदा -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’प्राकृतिक आपदा -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
रूप घनाक्षरी छंद में कभी-कहीं बाढ़ आए, कभी तो सुखाड़ आए, सड़कें मकान सारे, हो जाते हैं जमींदोज़। पहाड़ चटक[...]
