Category: प्रकृति

Ram Kishore Pathak

अलाव-राम किशोर पाठक प्रधान शिक्षकअलाव-राम किशोर पाठक प्रधान शिक्षक

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कुहासा है घना देखो, जलाने आग अब आओ। रहे हो कांँपते अबतक, जरा अब तापकर जाओ।। पता पथ का नहीं[...]

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Ram Kishor Pathak

उत्पाती वर्षा – राम किशोर पाठकउत्पाती वर्षा – राम किशोर पाठक

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उत्पाती वर्षा वर्षा रानी क्रुद्ध हो, करती है उत्पात।इंद्र साथ भी दे रहे, कर भीषण वज्रपात।। बाहर खतरा है घना,[...]

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Jainendra

प्राकृतिक आपदा -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’प्राकृतिक आपदा -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 11:21 am

रूप घनाक्षरी छंद में कभी-कहीं बाढ़ आए, कभी तो सुखाड़ आए, सड़कें मकान सारे, हो जाते हैं जमींदोज़। पहाड़ चटक[...]

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