पद्यपंकज Prem,दिवस पिता-रूचिका

पिता-रूचिका


Ruchika

उम्र के पायदान दर पायदान चढ़ते पिता
पहले से थोड़ा अधिक सुस्ताते हैं
मगर जिद पर अड़े हुए वह
उम्र को धता बनाने की कोशिश में
अधिक आत्मविश्वासी बन जाते हैं।

अनुभवों के पिटारे से रोज दो चार
नए अनुभवों से रूबरू करवाते पिता
थक कर भी नही थकते
धुन के पक्के,किस्मत बदलते अपने कर्मो से
थोड़ा अधिक आशावादी बन जाते हैं।

आसान नही होता उनके साँचे को बदलना,
आसान नही होता उनके साँचे में ढलना,
पीढ़ियों के अंतर को समझकर भी
अपने समय की गाँठ बाँधकर
नए समय के साथ तारतम्य बिठाते हैं।

थोड़ा अधिक अनुशासित,
थोड़ा अधिक संयमित
कभी कभी बच्चे सरीखे बनकर
जिंदगी से नए अनुभव लेकर
जिंदादिली से जिंदगी को बिताते हैं।

रूचिका
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार

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