पद्यपंकज sandeshparak पिता का सम्मान-मनु कुमारी

पिता का सम्मान-मनु कुमारी


Manu Raman Chetna

पिता संग मानव का जीवन, होता सखे निहाल है,

बिना पिता के मां- बच्चों का ,होता सुन लो बुरा हाल है।

पिता है तो रोटी,कपड़ा और सिर पर मकान है ,
पिता के कारण हीं होता मानवता का ज्ञान है।

पिता से हीं मेहनत, त्याग, संघर्ष की कहानी है,
पिता हमारे रक्त में ,दया,करूणा की निशानी हैं।

मां सहनीशलता की मूर्ति , पिता अनुशासन का आधार है,
पिता के कारण बच्चों के होते, हर सपनें साकार हैं।

मां हैं प्यारी धरती माता तो ,पिता अनंत आसमान हैं,
बच्चों के लिए माता- पिता हीं ,उनकी दुनिया जहान हैं।

अंगुली पकड़कर चलना सिखाते, कंधों पर जहां दिखाते हैं,
अनुभव की बातों को कहकर , जीवन का मर्म बताते हैं।

फटे -चिथड़े कपड़े – जूते, पहन खुशी से लेते हैं,
खुद कठिनाइयां सहकर हम सबको, सारी खुशियां देते हैं।

दुख के आंसू पीकर स्वयं, विपदा में भी वो मुस्काते हैं,
हर मुश्किल का सामना डटकर ,करना हमें सिखाते हैं।

पिता का सम्मान जगत में ,सबसे बड़ा सम्मान है,
बच्चों के लिए माता – पिता सुन ,ईश्वर का वरदान हैं।

माता- पिता की सेवा भक्ति से संतान का बढ़ता मान है,
माता- पिता के चरणों में सुख है, कहते यह भगवान हैं।

स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका

प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी

राघोपुर, सुपौल

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