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जिम्मेदारियों की बोझ लिए कंधे पर,
हर मुसीबत में मुस्कान है पिता।
हमारा अरमान हमारी पहचान,
धरती अंबर और जहान है पिता।
जिसके तले परिवार को मिलता छांव
वह बरगद का पेड़ है पिता।
स्वयं से ज्यादा संतान की कामयाबी
चाहता एक ऐसा इंसान है पिता।
राह भटक जाए सच्चा राह दिखाता,
गिर -गिरकर उठना सिखाता पिता।
अपनी खुशियों की परवाह नहीं,
जीवन की हर खुशी देते पिता।
चाहे तन पर फटे वस्त्र हो,
अपनी मुस्कान से छुपाते पिता।
जब संग ना कोई खेलता,
खिलाड़ी बन जाते पिता।
चेहरे पर गुस्सा दिल में प्यार,
संतान के लिए जान लगा देते पिता।
उंगली पकड़कर चलना सिखाते,
ईश्वर का प्रतिमान है पिता।
ब्यूटी कुमारी
प्रधान शिक्षक
दलसिंहसराय,
समस्तीपुर

