करवा चौथ – विधाता छंद सुहागन आज करती है जहाँ उपवास भर दिन का।सुधाकर को निहारी है सुहानी रात जीवन का।।अमर सिंदूर हो मेरा नहीं हो कष्ट भी थोड़ा।यही शुभ…
Category: Prem
Love has no definition, and it is a feeling that comes within the heart. The meaning of love can be different for different people, different age groups, and different relationships, but the surface is the same for everyone. Love comes from knowledge, and for this, one needs to understand oneself.
करवा चौथ – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
विधाता छंदाधारित मुक्तककरवा चौथ कहीं संगम कहीं तीरथ,धरा पर पुण्य बहते हैं, सजी हैं नारियाॅं भूपर,कहेंगे व्यर्थ कहते हैं। हजारों साल जिंदा हो,चमकता माॅंग का सिंदूर.., जहाॅं पतिदेव की सेवा,वहाॅं…
तुमसे ही है – अवधेश कुमार
हो जाए पूरे ख्वाब, वो तुमसे ही है,सुबह की हर शुरुआत, वो तुमसे ही है। कहने को हर बात, है तुमसे ही,सुनने की हर बात, है तुमसे ही।जानने का हर…
गुलाब की कामना – अवधेश कुमार
ये गुलाब समर्पित हैं उन्हें,जिनसे हमने सच्चा प्रेम किया है —निश्छल, अनवरत, बंधनहीन प्रेम। जैसे ही उनकी याद आती है,चेहरे पर मुस्कान खिल उठती है।ये अहसास रोज जन्म लेता है,पर…
भावुक हूं मैं.. डॉ स्वराक्षी स्वरा
हां,मैं भावुक ही तो हूंतभी तो सह नहीं पातीहल्की सी भी चोट,फिर चाहे वो शरीर पर हो या कि लगे हों दिल पर।। हां,मैं भावुक ही तो हूंतभी तो देख…
हिंदी – सार छंद
हिंदी – सार छंद सागर सी है गहरी भाषा, प्रेम जगाने वाली। इसके अंदर ज्ञान छुपा है, सुंदर सुखद निराली।। संस्कृत की बेटी हिंदी है, अति मनहर सी भाषा। वधु…
जीवित्पुत्रिका व्रत
जीवित्पुत्रिका व्रत माता निर्जल व्रत करे, सुखी रहे संतान। महाकाल को पूजती, जो लेते संज्ञान।। एक दिवस उपवास का, कोटि विधि स्वीकार। सुखमय मेरा लाल हो, करती सदा विचार।। भाँति-भाँति…
हिंदी है अस्मिता हमारी -प्रदीप छंद गीत – राम किशोर पाठक
हिंदी है अस्मिता हमारी -प्रदीप छंद गीत मन के भावों को करती जो, सरल सहज गुणगान है। हिंदी है अस्मिता हमारी, इससे हर पहचान है।। दसों दिशाएँ गूँज रही है,…
हुई उत्पत्ति है हिंदी की – गीत – राम किशोर पाठक
हुई उत्पत्ति है हिंदी की – गीत शौरसेनी अपभ्रंश जिसे, अपनी तनुजा माने। हुई उत्पत्ति है हिंदी की, सुरवाणी से जाने।। उत्तर भारत में जन्म हुआ, जानी दुनिया सारी। भाषाएँ…
चलो नेह का दीप जलाएँ- किशोर छंद – राम किशोर पाठक
चलो नेह का दीप जलाएँ- किशोर छंद चलो नेह का दीप जलाएँ, कैसे भी। सबसे मिलकर स्नेह बढ़ाएँ, कैसे भी। क्षमा भाव को मन में लाएँ, कैसे भी। सबको अपना…