कहता हूं, व्यक्ति अपने संस्कार का ही होता है गुलाम, सुसंस्कारवश अच्छा काम करता, कुसंस्कार से बुरा काम, अच्छा संस्कार[...]
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
मत कर मेरी अभी ब्याह री मेरी मैया – नीतू रानीमत कर मेरी अभी ब्याह री मेरी मैया – नीतू रानी
मत कर मेरी अभी ब्याह री मेरी मैया – नीतू रानी मत कर अभी मेरी,ब्याह री मेरी मैया, अभी न[...]
प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
श्याम वंशीवाला सिर पे मुकुट मोर, गोपियों के चित्तचोर, होंठ लाले-लाल किये, खड़ा बंसी वाला है। कहते हैं ग्वाल-बाल, मित्र[...]
नशे में युवा पीढ़ी – बिंदु अग्रवालनशे में युवा पीढ़ी – बिंदु अग्रवाल
नशे के गर्त में डूब रही है, आज की युवा पीढ़ी। कर्णधार कहलाते देश के, विकास की है जो सीढ़ी।[...]
हे सखी! – पथिका छंद – राम किशोर पाठकहे सखी! – पथिका छंद – राम किशोर पाठक
हे सखी! – पथिका छंद – राम किशोर पाठक हे सखी! मुझे बतलाओ। कैसे रहूँ बिना साजन के, बैठी घर[...]
पगडंडी पर भागे ऐसे – रामपाल प्रसाद सिंह अनजानपगडंडी पर भागे ऐसे – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
पगडंडी पर भागे ऐसे, बालक सुलभ सलोने हैं। नन्हीं-नन्हे साथ-साथ हैं, अनुभव नए पिरोने हैं। पगडंडी भी स्वागत करने, हरियाली[...]
मुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठकमुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठक
अम्मा कुछ मुझको बतलाओ। मुझको कान्हा आज बनाओ। जो चाहूँ वह दे दो मुझको। ऐसे कभी नहीं तड़पाओ।। मैं भी[...]
बाल कविता – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बाल कविता – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
होकर मगन गगन के नीचे, दौड़ रहे ये बच्चे हैं। जिन्हें देखकर वयोवृद्ध सब,अंतर मन से नच्चे हैं।। हरियाली के[...]
काम का महत्व-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’काम का महत्व-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
सीखाते कुरान-गीता, गुरुजन माता-पिता, हमें ये जीवन नहीं, मिला है आराम को। मजदूर किसानों को मिलता विश्राम नहीं, सुबह सबेरे[...]
लेखनी-एस.के.पूनमलेखनी-एस.के.पूनम
सोच रही है लेखनी, कहाँ से प्रारंभ करुँ, फँस गया विचारों में,हो न जाए परिहास। तूलिका भी डर रही, कागज[...]
