एक पौधा लगाऊंगा – राम बाबू राम

एक पौधा लगाऊंगा   एक पौधा लगाऊंगा, उसमें रोज पानी डालूंगा। जंगल-झाड़ काटकर, साफ-सुथरा रखूंगा, जब पौधा बड़ा हो जाए, उसके छांव में बैठूंगा। फिर झूला झूलूंगा, फल तोड़ घर…

हिंदी: सुर वाणी की जाया- राम किशोर पाठक

हिंदी, सुर वाणी की जाया- किशोर छंद सुर वाणी की जाया कहिए, हिंदी को। भूल रहे सब क्यों है गहिए, हिंदी को।। हृदय भाव में फिर से भरिए, हिंदी को।…

चलो नेह का दीप जलाएँ- किशोर छंद – राम किशोर पाठक

चलो नेह का दीप जलाएँ- किशोर छंद चलो नेह का दीप जलाएँ, कैसे भी। सबसे मिलकर स्नेह बढ़ाएँ, कैसे भी। क्षमा भाव को मन में लाएँ, कैसे भी। सबको अपना…

शिक्षक – राम किशोर पाठक

शिक्षक शिक्षा दे सदा, मान इसे निज धर्म। छात्र समर्पित हो जहाँ, करता अपना कर्म।। शिक्षक साधक सा सदा, करे साधना रोज। कंटक पथ चलता हुआ, भरे छात्र में ओज।।…

गुरु पग गहकर

गुरु पग गहकर- सुपवित्रा छंद वार्णिक हम-सब हरपल, सफल यहाँ हैं। सबल प्रबल बन, मगन जहाँ हैं।। सरस सहज सब, गजब कहाँ है। हितकर गुरु जब, सजग वहाँ है।। पथ…

तुम्हें जो सिखाए – राम किशोर पाठक

जलाए सदा दीप आओ बताए। उन्हें मान देना तुम्हें जो सिखाए।। सदा हाथ थामें तुझे जो बढ़ाया। उसे याद लाओ कहो क्यों भुलाया।। सदा शीश आगे उन्हीं के झुकाना। सिखाया…