सीता माय के पावन जन्मभूमि , मधुबनी झंझारपुर । ताहि में बनल अछि मिथिला हाट । गेलों घुमय सपरिवार। दुई बजे सब ओतय पहुंचलों । ओतय देखय छी उमड़ल भीड़…
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
लोहड़ी पर्व -मनु कुमारी
खुशियां लेकर लोहड़ी आई। सबके मन उमंग है छाई। सुख समृद्धि संग लेकर आती। सबको प्रेम से गले लगाती। पुराने फसल हैं काटे जाते। साथ नये फिर बोये जाते। …
मकर संक्रांति-रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
भोर आज हो रहा। हर्ष राज हो रहा।। आर-पार शोर है। लोहड़ी हिलोर है।। आज सूर्य आ गया। लाल सब्र छा गया।। हर्ष तो नवीन है। दर्द से विहीन है।।…
मकर संक्रांति-राम किशोर पाठक
पुण्य के पल का समझकर राज, पर्व हम अपना मनाएँ। जाह्नवी जल में नहाकर आज, पर्व हम अपना मनाएँ।। हर्ष से अति पावनी जलधार, सिंधु में थी लीन होती। उस…
मकर संक्रांति-बैकुंठ बिहारी
आया मकर संक्रांति का पर्व, जो बनाता संतुलन प्रकृति के साथ, संतुलन सूर्योपासना के साथ, संतुलन मानव जीवन के साथ। आया मकर संक्रांति का पर्व, जो जाना जाता है विभिन्न…
कहर-रामपाल प्रसाद सिंह “अनजान”
गजब शीत काया। बदन काट खाया।। अब कहाॅं सवेरा?। अरुण का बसेरा।। कनकनी चढ़ी है। थरथरी बढ़ी है।। सुबह शाम कैसा! लहर एक जैसा।। पिक निवास सोई। मधुर प्रीति खोई।।…
मैं पतंग हूँ मुझे उड़ने दो आकाश में-नीतू रानी
मैं पतंग हूँ मुझे उड़ने दो खुले नीले आकाश में, मेरे पैरों में धागा न बाँधना नही तो गिर जाउंगा मझधार में। अभी मैं हूँ बहुत हीं छोटा मैं हूँ…
जीवन दर्शन-मनु कुमारी
यह जीवन बड़ा अनमोल है, इसे व्यर्थ न गँवाया करो। सुख-दुःख इसमें समाए हुए हैं, इनसे कभी न घबराया करो। सुख-दुःख तो जीवन में आते हैं और जाते हैं, यदि…
मत कर अभी ब्याह मेरी मैया – नीतू रानी
मत कर अभी ब्याह मेरी मैया – नीतू रानी मत कर अभी मेरी ब्याह मेरी मैया, अभी न हुई ब्याह की लायक मेरी मैया। मुझे अभी स्कूल पढ़ने…
एक अभिशाप – विवेक कुमार
एक अभिशाप – विवेक कुमार बेटी ने पूछा बापू से — “इतनी ब्याह की क्या जल्दी?” थोड़ी तो बढ़ जाने दो, अभी तो मैं नादान हूँ, थोड़ी तो ढल…