Category: sandeshparak

Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.

अहिंसा के पुजारी -आशीष अम्बरअहिंसा के पुजारी -आशीष अम्बर

0 Comments 11:42 pm

हाथों में हथियार नही है, मन में है सत्य का विश्वास । हर चेहरे पर मुस्कान रहे , गाँधी जी[...]

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M S Hussain Kaimuri

समझने के लिए पढ़ना पड़ता है-एम० एस० हुसैन “कैमूरी” समझने के लिए पढ़ना पड़ता है-एम० एस० हुसैन “कैमूरी” 

0 Comments 11:32 pm

अच्छी किताबें और अच्छे लोग,  आसानी से समझ में नहीं आते हैं।  उनकी गहराइयों को जानने के लिए,  जनाब! उन्हें[...]

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महात्मा गांधी जयंती – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’महात्मा गांधी जयंती – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

0 Comments 3:45 pm

दो अक्टूबर दिवस अनोखा,आया है शुभ वार। नभ से दिव्य पुरुष हैं उतरे,फैलाए संस्कार।। जिनका बचपन अनुशासित था,पाए हम उपहार।[...]

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ज़िंदगी एक चुनौती-कुमारी प्रियंका वर्माज़िंदगी एक चुनौती-कुमारी प्रियंका वर्मा

0 Comments 3:40 pm

ज़िंदगी अगर दे चुनौती, सहर्ष इसे स्वीकार कर। ना कभी तू बैठ यूँ ही ज़िंदगी से हारकर, ज़िंदगी अगर दे[...]

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अट्ठाइस मोतियों की माला – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरअट्ठाइस मोतियों की माला – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 3:30 pm

 चलो भारत की सैर करें, भारत माँ के हम अट्ठाइस बेटे। सब में हैं बड़े-बड़े गुण, भारतवासी सभी सुन। सबके[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

कर्तव्य और शिक्षा-धर्मेंद्र कुमार ठाकुरकर्तव्य और शिक्षा-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:29 pm

जल्दी-जल्दी आदत बदलो, आलस का तुम त्याग करो, नूतन पथ पर कदम बढ़ाओ, जीवन में अनुराग भरो। शिक्षा से ही[...]

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जारी रखना-संतोषी कुमारी जारी रखना-संतोषी कुमारी 

0 Comments 8:21 pm

बागों से वादों को निभाना जारी रखना, पतझड़ में भी बाग सजाना जारी रखना। पत्ते टूटें, पर शाख बचाना जारी[...]

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Khushboo Kumari

मेरी माँ – खुशबू कुमारी मेरी माँ – खुशबू कुमारी 

0 Comments 4:44 pm

दिखने में बिल्कुल सरल और सहज, मेरे जीवन की वास्तविक सच्चाई, हमारी हर सफलता की परिभाषा, हम बच्चों की प्रेरणा[...]

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Girindra Mohan Jha

पुत्री-दिवस-गिरीन्द्र मोहन झापुत्री-दिवस-गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 4:39 pm

धन्य वह गेह है, जहां खिलखिलाती बेटियाँ, धन्य वह गेह है, जहाँ चहचहाती हैं बेटियाँ, धर्म-ग्रंथ कहते हैं, गृह-लक्ष्मी होती[...]

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