किनारा-रूचिका

किनारों पर खड़ा होकर गहराई का अंदाजा लगा नही सकते, बिना चोट के दर्द कितना ये कहाँ कभी बता सकते। कयास ,अंदाज ,अटकलें चाहे कितना भी लगा लें बिना चखे…

युवा-कुमारी रूपरानी 

“युवा हैं हमारे देश की शान  आओ मिलकर करें सलाम।। अपने जीवन को ना करो ध्रुमपान और मादक द्रव में बर्बाद, क्योंकि तुमसे हैं, मां-बाप का ही नहीं देश को…

बसंत ऋतु आया-मुन्नी कुमारी 

देखो बसंत ऋतु है आया,  कितना सुंदर खुशियां लाया।  मोर, पपीहा, कोयल गाए,  सुंदर-सुंदर पक्षी छाए।  देखो बसंत ऋतु है आया, कितना सुंदर खुशियां लाया। सुबह-सुबह जब सुरज निकले,  मन…