चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता

चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता यहाॅं कुछ लोग हैं दिखते, सुवासित कर रहे जग को। कटीली झाड़ियों में से, निकाले थे कभी मग को।। अभावों…

संसार- दोहे – राम किशोर पाठक

संसार- दोहे जैसी मन की भावना, वैसा ही संसार। अपने-अपने कर्म की, झेल रहे सब मार।।०१।। दुख को जो है झेलता, कहे दुखी संसार। खुशियाँ जिसको हैं मिली, वह करता…

राष्ट्रीय पक्षी दिवस – मनहरण घनाक्षरी – राम किशोर पाठक

राष्ट्रीय पक्षी दिवस – मनहरण घनाक्षरी – राम किशोर पाठक आया यह दिन खास, करना है अहसास, जनवरी पाँच आज, समझ बनाइए। कौआ चील गिद्ध मोर, पक्षियों के भाए शोर,…

दोहे – राम किशोर पाठक

दोहे सोमेश्वर सबके सखा, सहज सुलभ संसार। संकटमोचक सम सदा, सकट सतत संहार।। भ्रमित भँवर भव-भय भुवन, भजन भाव भगवंत। सरल साधना संग सह, सहज सुलभ सब संत।। शुभद शिवाला…

प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ बाबा औघड़ दानी धतूरा के फूल गंगा जल पर रीझते हो, तभी तो औघड़ दानी, कहलाते भोलेनाथ। राजा-रंक तुझे प्यारा, तूने सभी को है…

कैसे समझोगे तुम – बैकुंठ बिहारी

कैसे समझोगे तुम कैसे समझोगे तुम समय को, जिसने लोगों को जीना सिखाया। कैसे समझोगे तुम स्वजन को,  जिसने तुम्हारा मान बढ़ाया। कैसे समझोगे तुम परिजन को,  जिसने तुम्हारा अपमान…

सजनी अपने आप से रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

सजनी अपने आप से –  रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ ट्रेन सवारी करके सजनी, देख रही रस्ते भर सपने। आस-पास की सुंदरता भी, कभी नहीं लगती है अपने।। पिया मिलन की…

दुनिया दौलत वालों की – मनहरण घनाक्षरी छंद – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

दुनिया दौलत वालों की मनहरण घनाक्षरी छंद भाग-१ किसी को तो दूध-भात मक्खन सुहाता नहीं, किसी को नमक-रोटी, मिलता न थाली में। किसी को तो भर पेट मिलता भोजन नहीं,…