मैडम जी! मैडम जी! कब खुलेगा हमारा प्यारा यह स्कूल ? हम बच्चों के बिना आप विद्यालय आतीं हैं ,[...]
Category: Shakshanik
घर की कलियाँ- राम किशोर पाठकघर की कलियाँ- राम किशोर पाठक
घर के उपवन की कलियों को। नेह लुटाती उन डलियों को।। ठीक नही ऐसे बिसराना। करके खाली चित गलियों को।।[...]
दियौ बच्चा केअ छुट्टी सरकार यौ – नीतू रानीदियौ बच्चा केअ छुट्टी सरकार यौ – नीतू रानी
दियौ केअ छुट्टी सरकार यौ, नै तेअ बच्चा सब बच्चापड़त बीमार यौ। आय तेअ सबसेअ बेसी येअ ठंडा धूप एखैन[...]
चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाताचित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता
चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता यहाॅं कुछ लोग हैं दिखते, सुवासित कर रहे जग को।[...]
संसार- दोहे – राम किशोर पाठकसंसार- दोहे – राम किशोर पाठक
संसार- दोहे जैसी मन की भावना, वैसा ही संसार। अपने-अपने कर्म की, झेल रहे सब मार।।०१।। दुख को जो है[...]
वंशी बजाए नंदलाल – नीतू रानीवंशी बजाए नंदलाल – नीतू रानी
वंशी बजाए नंदलाल – नीतू रानी सब गायों के बीच में वंशी बजाए नंदलाल, एक भी नही दिख रहा वहाँ[...]
राष्ट्रीय पक्षी दिवस – मनहरण घनाक्षरी – राम किशोर पाठकराष्ट्रीय पक्षी दिवस – मनहरण घनाक्षरी – राम किशोर पाठक
राष्ट्रीय पक्षी दिवस – मनहरण घनाक्षरी – राम किशोर पाठक आया यह दिन खास, करना है अहसास, जनवरी पाँच आज,[...]
दोहे – राम किशोर पाठकदोहे – राम किशोर पाठक
दोहे सोमेश्वर सबके सखा, सहज सुलभ संसार। संकटमोचक सम सदा, सकट सतत संहार।। भ्रमित भँवर भव-भय भुवन, भजन भाव भगवंत।[...]
प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ बाबा औघड़ दानी धतूरा के फूल गंगा जल पर रीझते हो, तभी तो औघड़[...]
कैसे समझोगे तुम – बैकुंठ बिहारीकैसे समझोगे तुम – बैकुंठ बिहारी
कैसे समझोगे तुम कैसे समझोगे तुम समय को, जिसने लोगों को जीना सिखाया। कैसे समझोगे तुम स्वजन को, जिसने तुम्हारा[...]
