Category: Shakshanik

Ram Kishore Pathak

राष्ट्र भक्त हम, कहलाएँ- वासुदेव छंद गीत  राम किशोर पाठक राष्ट्र भक्त हम, कहलाएँ- वासुदेव छंद गीत  राम किशोर पाठक 

0 Comments 7:59 pm

राष्ट्र भक्त हम, कहलाएँ- वासुदेव छंद गीत  राष्ट्र हेतु हम, मिट जाएँ। राष्ट्र-भक्त हम, कहलाएँ।। आओ मिलकर, पले यहाँ। कदम[...]

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बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

0 Comments 6:58 pm

आजादी आधार, मिली जब से भारत को। दौड़ पड़े सबलोग,विनत हुए सु-स्वागत को।। सुनकर विस्मित मान,रहे हैं खुद को प्राणी।[...]

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Ram Kishore Pathak

फिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठकफिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठक

0 Comments 4:06 pm

कहती अम्मा मुझको लल्ला। फिर क्यों करती है माँ हल्ला।। कान्हा थें कितना ही नटखट। माखन मिसरी खाते चटपट।। घूमा[...]

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रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

0 Comments 7:07 pm

बोल अरे क ख या ग घ,घोल मिठापन डाल रही है। बैठ गई जब सम्मुख माॅं तब,बालक ज्ञान प्रक्षाल रही[...]

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Ram Kishore Pathak

सर्दी- कहमुकरी- राम किशोर पाठक सर्दी- कहमुकरी- राम किशोर पाठक 

0 Comments 4:18 pm

सर्दी – कहमुकरी स्पर्श सदा कंपित है करती। रोम-रोम में सिहरन भरती।। जैसे वह हमसे बेदर्दी। क्या सखि? साजन! न[...]

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Ram Kishore Pathak

किसान – राम किशोर पाठककिसान – राम किशोर पाठक

0 Comments 11:56 am

खेतों का है रंग सुनहरा। जैसे सोना रहता बिखरा।। फसल धान की है खेतों में। श्रम का प्रतिफल है रेतों[...]

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Jainendra

गाँधी की दरकार है – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’गाँधी की दरकार है – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 10:19 pm

भारत की चुनावों में  धन की है बोलबाला, पैसे से ही आज यहांँ, होती जीत- हार है। अधिकांश लोग एक [...]

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Ram Kishore Pathak

जाति-वर्ण लोकतंत्र पर भारी – राम किशोर पाठक जाति-वर्ण लोकतंत्र पर भारी – राम किशोर पाठक 

0 Comments 10:19 pm

है लोकतंत्र की महिमा न्यारी। चलती जिससे संविधान प्यारी।। सबने बदली अब दुनियादारी। लूट रहे धन कहकर सरकारी।। लेकर सारे[...]

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Ram Kishore Pathak

संस्मरण गीत   –  राम किशोर पाठकसंस्मरण गीत   –  राम किशोर पाठक

0 Comments 5:25 pm

संस्मरण गीत   –  राम किशोर पाठक     चंद पैसों में भली वह, जिंदगी जीते हुए। आ रही है याद[...]

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