सब चीजों से सबसे प्यारी,होती है किताब । उलझे – उलझे हर सवाल का,देती है जवाब । इसको पढ़कर बन[...]
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ममतामई मां -जैनेंद्र प्रसाद रविममतामई मां -जैनेंद्र प्रसाद रवि
प्रभाती पुष्प ममतामई मांँ कलाई में शोभता है- कंगन व बाजूबंद, मनमोहता है देवी, माता का सिंगार है। जिज्ञासु श्रद्धालु[...]
लोहार – रामपाल प्रसाद सिंहलोहार – रामपाल प्रसाद सिंह
लोहार लोहे पर निर्भर जीवन,लोहार हूॅं मैं।कम पैसे में काम करूॅं,उपकार हूॅं मैं।विस्मित कर देता जग को,फनकार हूॅं मैं।मानसून के[...]
सब कुछ याद है – धीरज कुमारसब कुछ याद है – धीरज कुमार
ओ सब कुछ याद है। वो घर के छत के चूते हुए छप्पर-छानी याद हैं, वो सावन में रिमझिम बरसता[...]
शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानशीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी।रोला कैसा है लावण्य, रूपसी नाजुक नारी।कोमल पीपल पात,सरीखे डिगती डारी।।जो जाते उस राह,भनक लेते[...]
एक पेड़ मां के नाम- रवि कुमारएक पेड़ मां के नाम- रवि कुमार
आओ हम सब मिलकर करें, एक काम ।चलो लगाते हैं ”एक पेड़ माँ के नाम”।। छाँव देते इसके पत्ते, लगते[...]
Hindi divasHindi divas
हिन्दी दिवस : रसों की सरिता सुरेश कुमार गौरव हिन्दी का श्रृंगार है, जैसे फूलों की[...]
हिंदीहिंदी
विश्व हिंदी दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं हिंदी! संस्कृत की जाई, देवनागरी लिखाई, स्वर व्यंजन वर्ण, सब से[...]
हिंदी माथे की बिंदी- जैनेन्द्र प्रसाद रविहिंदी माथे की बिंदी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि
मनहरण घनाक्षरी छंद भाग-१सुगम हमारी हिन्दी,देश के माथे की बिंदी,हिंदी से ही भारत की, होती पहचान है। संस्कृत की बेटी[...]
शिक्षक -अजय कुमारशिक्षक -अजय कुमार
शिक्षक माताऐं देती नव जीवन, पृथ्वी देती अन्न – जल, पिता सुरक्षा करते हैं, लेकिन सच्ची मानवता, शिक्षक जीवन में[...]
