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Jainendra

ममतामई मां -जैनेंद्र प्रसाद रविममतामई मां -जैनेंद्र प्रसाद रवि

0 Comments 1:30 pm

प्रभाती पुष्प ममतामई मांँ कलाई में शोभता है- कंगन व बाजूबंद, मनमोहता है देवी, माता का सिंगार है। जिज्ञासु श्रद्धालु[...]

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लोहार – रामपाल प्रसाद सिंहलोहार – रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 8:33 am

लोहार लोहे पर निर्भर जीवन,लोहार हूॅं मैं।कम पैसे में काम करूॅं,उपकार हूॅं मैं।विस्मित कर देता जग को,फनकार हूॅं मैं।मानसून के[...]

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शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानशीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

0 Comments 10:42 pm

शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी।रोला कैसा है लावण्य, रूपसी नाजुक नारी।कोमल पीपल पात,सरीखे डिगती डारी।।जो जाते उस राह,भनक लेते[...]

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एक पेड़ मां के नाम- रवि कुमारएक पेड़ मां के नाम- रवि कुमार

0 Comments 10:15 pm

आओ हम सब मिलकर करें, एक काम ।चलो लगाते हैं ”एक पेड़ माँ के नाम”।। छाँव देते इसके पत्ते, लगते[...]

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Jainendra Prasad Ravi

हिंदी माथे की बिंदी- जैनेन्द्र प्रसाद रविहिंदी माथे की बिंदी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 7:46 am

मनहरण घनाक्षरी छंद भाग-१सुगम हमारी हिन्दी,देश के माथे की बिंदी,हिंदी से ही भारत की, होती पहचान है। संस्कृत की बेटी[...]

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शिक्षक -अजय कुमारशिक्षक -अजय कुमार

0 Comments 6:04 pm

शिक्षक माताऐं देती नव जीवन, पृथ्वी देती अन्न – जल, पिता सुरक्षा करते हैं, लेकिन सच्ची मानवता, शिक्षक जीवन में[...]

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