Category: Uncategorized

Jainendra

कचरे की ढेर जैनेंद्र प्रसादकचरे की ढेर जैनेंद्र प्रसाद

0 Comments 7:00 pm

कचरे की ढेर समसामयिक रचना सबको दे खुशहाली, चली गई ये दिवाली, बाजारों में जमा हुई, कचरे की ढेर है।[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishor Pathak

गोवर्धन- राम किशोर पाठकगोवर्धन- राम किशोर पाठक

0 Comments 6:52 pm

गोवर्धन- पादाकुलक छंद आधारित गीत व्रज वनिता के वासी प्यारे। मोहन नख पर पर्वत धारे।। सुरपति जमकर जल बरसाए। व्रजवासी[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

मिलकर दीप जलाएँ – बाल गीतमिलकर दीप जलाएँ – बाल गीत

0 Comments 10:45 pm

मिलकर दीप जलाएँ – बाल गीत आओ खुशी मनाएँ। मिलकर दीप जलाएँ।। घना अँधेरा छाया। धन्य अमावस आया।। कहते सभी[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

दीप जलाने आओ – राम किशोर पाठकदीप जलाने आओ – राम किशोर पाठक

0 Comments 10:44 pm

दीप जलाने आओ- गीत वैर को आज मिटाने आओ। दीप से दीप जलाने आओ।। द्वेष कोई अपनाना छोड़ो। भाव सारे[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishor Pathak

दिवाली आई – गीतिका – राम किशोर पाठकदिवाली आई – गीतिका – राम किशोर पाठक

0 Comments 7:37 am

दिवाली आई- गीतिका कूड़ा-करकट करो सफाई। है नजदीक दिवाली आई।। कार्तिक लेकर शुभता आता। सदियों से यह रीत निभाई ।।[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

गीदड़ तब शोर मचाएगा – रामपाल प्रसाद सिंहगीदड़ तब शोर मचाएगा – रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 8:11 pm

गीदड़ तब शोर मचाएगा… निज शेर पाॅंव पीछे खींचे। निज ऑंखों को करके नीचे।। तब बुरा समझ कहलाएगा गीदड़ तब[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

करवा चौथ -रामपाल प्रसाद सिंहकरवा चौथ -रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 4:38 pm

करवा चौथ देवी धरोहर पार्वती जय,जय देवी पांचाली की। आज करें विनती हम मिलकर,पुण्य बहाने वाली की।। पाकर कथा शुभंकर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

करवा चौथ – रामपाल प्रसाद सिंह अनजानकरवा चौथ – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

0 Comments 7:59 pm

विधाता छंदाधारित मुक्तककरवा चौथ कहीं संगम कहीं तीरथ,धरा पर पुण्य बहते हैं, सजी हैं नारियाॅं भूपर,कहेंगे व्यर्थ कहते हैं। हजारों[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

वृद्धावस्था-गिरींद्र मोहन झावृद्धावस्था-गिरींद्र मोहन झा

0 Comments 12:50 pm

वृद्धावस्था (कविता: गिरीन्द्र मोहन झा) शैशव, बाल्य, किशोर, युवा, से होकर तुम बने हो वृद्ध, तुम्हारा असली,बड़ा गुण है, हर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishor Pathak

जिंदगी – राम किशोर पाठकजिंदगी – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:37 pm

जिंदगी -सूर घनाक्षरी एक रास्ता है जिंदगी,आओ कर लें बंदगी,त्याग चित की गंदगी, चलते जाइए।कर्म धर्म मर्म ज्ञान,अपना पराया जान,सबको[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें