नीले – पीले , लाल – काले,
प्यारे – प्यारे , भोले – भाले ,
चारू – चंचल और मतवाले ,
भीनी – भीनी खुशबू वाले,
ये डाली के फूल ।
कभी शरमाएँ , कभी मुस्काएँ ,
झूम – झूम कर नाचे गाएँ,
कभी झुक जाएँ, कभी उठ जाएँ,
तो कली पवन संग लहराएँ,
ये डाली के फूल ।
गुप – चुप , गुप – चुप बातें करते,
हँसकर जीते, हँसकर मरते,
झ्क दूजे का दुःख – सुख सहते ,
इक डाली पर अनगिन रहते,
ये डाली के फूल ।
बगिया को महकाते जाएँ,
झरते – झरते कहते जाएँ,
जीवन है बस प्यार ही प्यार ,
पतझड़ हो या वसंत बहार,
ये डाली के फूल ।
आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार

