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देवी आह्वान – अर्चना कुमारी
करते तो हैं हम देवी आह्वान
पर करते क्या ? नारी-सम्मान
कोख से जिनकी जन्म लिया
उनका ही क्यों करते अपमान
तप,त्याग औ’ममता की मूरत
रहती खड़ी,जब पड़ी जरूरत
उपेक्षा क्यों फिर मातृशक्ति की
जो नैनन नीर भरी सी है सूरत
है समस्त सृष्टि की सर्जक नारी
समझो ना उसे महज बेचारी
नव उड़ान वो भी भर सकती
गर मिले पुरूषों सी उम्मीदें सारी
उनका भी अस्तित्व है अपना
जीवन जीना उनका भी सपना
मत कुचलो नन्ही कलियों को
खिलने भी दो हर गली-अँगना
क्यों अबला-अबला करे संसार
नारी ही तो समस्त जीवन आधार
जागृत कर ले गर अंत:करण को
लगाए ना फिर वो कभी गुहार
आओ मिलकर हम लें ये ठान
हर नारी का हम करें उत्थान
कतरें ना कभी पंख हम उनके
बनाने दें उन्हें एक सुंदर जहान
अर्चना कुमारी

