पद्यपंकज Khushi,sandeshparak,Shakshanik फागुन-राम किशोर पाठक

फागुन-राम किशोर पाठक


Ram Kishore Pathak

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अन्न भरा खेतों में, मन को भाया है।

हलचल अब रेतों में, फागुन आया है।।

सरसों पीली फूले, मस्ती से झूमे।

पाकर खिलती कलियाँ, भौरों ने चूमे।।

मादक हुई हवाएँ, तन हर्षाया है।

हलचल अब रेतों में, फागुन आया है।।०१।।

चंपा और चमेली, गेंदा सह बेली।

लिपट मकरंद सबसे, करती अठखेली।।

अब भ्रमर कुमुदिनी से, नेह लगाया है।

हलचल अब रेतों में, फागुन आया है।।०२।।

लाज छोड़ गुजरिया, दृग तीर चलाए।

चंचल शोख डगरिया, अब डँसती जाए।।

नैना कुछ मतवाली, हमें सताया है।

हलचल अब रेतों में, फागुन आया है।।०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक

प्रधान शिक्षक

प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला

बिहटा, पटना, बिहार।

संपर्क – 9835232978

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