आपका ब्राउज़र Text-to-Speech सपोर्ट नहीं करता।
शून्य कहे—”मैं खाली हूँ,”
पर पीछे लगकर मान बढ़ाता।
एक अकेला जब आ जाए,
शुरुआत नई वह कर जाता।
शून्य से दस तक पहुँच गए,
तो खेल समझ में आया है।
गणित की समझ सीख लो तुम,
इसमें ही ज्ञान समाया है।
जोड़ सिखाता मेल-जोल,
यह कुनबा रोज़ बढ़ाता है।
पर जैसी ही आए घटाव की बारी,
सबका अंतर साफ़ दिखाता है!
गुणा करे पल में तरक्की,
संख्या सौ गुनी हो जाए।
और भाग सिखाए बांट के खाना,
चाहे हिस्सा छोटा हाथ आए!
जब जीवन में आ जाए उलझन,
और राहें अलग-अलग हो जाएँ।
तब लघुत्तम (LCM) सबको साथ मिलाकर,
एक बड़ा सा संगठन बनाएँ!
और ढूँढना हो जब गहरा रिश्ता,
जो सबके अंदर कॉमन (Common) भाई।
तब महत्तम (HCF) काम में आता,
जिसने सबसे बड़ी कॉमन वैल्यू पाई!
पेपर में जब ‘एक्स’ (x) और ‘वाई’ (y),
भूत बनकर डराने आते हैं।
अच्छे-अच्छे ज्ञानी बाबू भी,
सिर खुजलाकर रह जाते हैं!
कहते हैं “माना राम की आयु…”,
खुद राम भी चक्कर खा जाए।
जो उलझाए ऐसे सवाल,
उसे शून्य का डंडा रास आए!
पर मत डरना तुम इन भूतों से,
ये बस तुमको भरमाते हैं।
लौट के बुद्धू घर को आए,
फिर शून्य से दस पर आते हैं!
सब गणना का सार यहीं पर,
दुनिया ने महिमा गाई है।
जिसने सीखे ये छह नियम,
उसने ही असली बुद्धि पाई है!
धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
प्राथमिक विद्यालय रेही टोला रानीगंज अररिया
09.10.2026

