हां समझो मुझको इसके पहले कि भाव शून्य ना बन जाऊ,, नित जीवन के संघर्षों से , हां अंतर्मन के[...]
Day: October 9, 2026
गणित का असली सार – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरगणित का असली सार – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
शून्य कहे—”मैं खाली हूँ,” पर पीछे लगकर मान बढ़ाता। एक अकेला जब आ जाए, शुरुआत नई वह कर जाता। शून्य[...]
मेरी माँ – कुमारी मधुमेरी माँ – कुमारी मधु
मन के कोने में एक झनकार सी उभरती है, सूखती आंखें,कांपते होठ,फिर भी ममता मयी चेहरा लिए मुझे सुबह शाम[...]
ज से म तक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरज से म तक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
जन्म से मरण: महाकाल का असीम चक्र सृष्टि के आदिम सन्नाटे को चीर कर, जब ‘ज’ का पहला स्पंदन गूंजा[...]
