नारी तुम प्रेम हो , आस्था हो, विश्वास हो ,
टूटी हुई उम्मीदों की एकमात्र आस हो ।
हर जान का तुम्ही तो आधार हो,
उठो अपने अस्तित्व को सम्भालो ।
केवल एक दिन ही नही ,
हर दिन नारी दिवस बना लो ।
दुनियां की पहचान है नारी,
दुनियां की एहसान है नारी ।
हर घर की जान है नारी ,
बेटी , माँ , बहन , भाभी बनकर,
घर – घर की शान है नारी ।
न समझो इसको तुम कमजोर,
मर्यादा और सम्मान है नारी।
दिलों में बस जाए वो है नारी,
ममता की मूरत है नारी,
नारी का होता सम्मान जहाँ पर,
बसते हैं भगवान वहाँ पर ।
आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार

