जल्दी-जल्दी आदत बदलो, आलस का तुम त्याग करो,
नूतन पथ पर कदम बढ़ाओ, जीवन में अनुराग भरो।
शिक्षा से ही जीवन सुधरेगा, मिटेगा अज्ञान का अंधकार,
यही बनाएगी तुमको मानव, यही करेगी बेड़ा पार।
छात्र रूप में जनम लिया है, तो कर्तव्य अपना पहचानो,
ज्ञान-साधना ही पूजा है, इस सत्य को तुम जानो।
अगर हटे कर्तव्य से पीछे, पथ से जो तुम भटकोगे,
अंधकार के उस गर्त में गिरकर, जीवन भर तुम तड़पोगे।
एक बार जो गिरे नीचे, फिर सम्भल न तुम पाओगे,
समय हाथ से निकल गया तो, रोओगे, पछताओगे।
उठो, जागो, इतिहास रचो, अपनी तकदीर संवारो,
जल्दी-जल्दी आदत सुधारो, शिक्षा से जीवन सुधारो!
यह समय नहीं है सोने का, यह तो कुछ कर दिखाने का है,
कठिन डगर पर चल कर ही, मंजिलों को पाने का है।
श्रम की स्याही से जो अपनी, किस्मत को खुद लिखते हैं,
संसार के इस महामंच पर, वे ही ध्रुव तारा बन चमकते हैं।
लो संकल्प आज तुम ऐसा, बाधाओं से न डरोगे,
विद्या धन को पाकर तुम, जग का कल्याण करोगे!
धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
प्राथमिक विद्यालय रेही टोला
रानीगंज अररिया

