करूणा की धारा – मनु कुमारी

Manu Raman Chetna

ममता की मूरत है वो, करूणा की निर्मल धारा है।

मां ,बहन ,पत्नी ,सखी रूप में,रिश्तों की बगिया को संवारा है।

रात- रात भर जागके जिसने,निज संतति को पाला है।

पति प्राण को यम के मुख से ,जाकर स्वयं निकाला है।

वेदों की वाणी बनकर, ज्ञान जगत में लाई है,

रण में दुर्गा बनकर उसने ,विजय पताका लहराई है।

बंधन तोड़ उड़ान भरे, नभ से ऊँची उसकी शान,

परिश्रम की हर धूप में खिलता, हर दिन उसका स्वाभिमान।

नारी गौरव ,शक्ति , शौर्य की अमर धरोहर कहलाती,

संस्कारों की ज्योति बन हर युग को राह दिखाती।

जहाँ नारी का मान रहे, वहीं सदा उत्कर्ष रहे,

उसकी वंदना से हीं हर रिश्तों में हर्ष रहे।

अटल संकल्पों से वह हर बाधा पार कराती,

नारी की महिमा से ही यह धरती स्वर्ग बन जाती।

श्रद्धा एवं भक्ति की वह ,अनुपम पहचान है,

नारी से ही जग में मानवता का सम्मान है।

स्वरचित एवं मौलिक 

मनु कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका

प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी, राघोपुर

सुपौल,बिहार

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