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“महागौरीति चाष्टमम” – अरविंद मिश्र “नीरज”
सौम्य सुंदर स्वरूप मधुर मोहक अनूप,
माथ चन्द्रमाक ज्योतिसँ जगमग मुकूट।
महागौरी बृषभ पर सवार शोभे,
कान कुण्डल रतन गलेहार शोभे।।
बाँह शोभे बाजुबन्द हाथ शोभे कंगना,
रुनुक झुनुक नूपुर केर अनुपम छन्हि रचना।
माँ हे ममतामयी भक्त बाट जोहे,
महागौरी बृषभ पर सवार शोभे।।
तपसँ तपित गौरवर्ण भेली माता,
भौतिक जगत केर सकल सुखदाता।
माँ हे ध्यान मगन योगी स्वरूप टोहे,
महागौरी बृषभ पर सवार शोभे।।
शंख चक्र धनुष बाण हाथमे आयुध महान,
आर्त केर आह भरल माय सुनु आह्वान।
माँ हे होय ने स्वजन सँ विछोह छोहे,
महागौरी बृषभ पर सवार शोभे।।
रचना
अरविंद मिश्र “नीरज”(कवि जी), सेवानिवृत्त प्राध्यापक, सहरसा

