शान माटी देश की।
मान है परिवेश की।।
भूख से यह त्राण दे।
दिव्यता कल्याण दे।।
है उगल सोना रही।
गर्व है भरती यही।।
शीश पर धारण करें।
राष्ट्र का तारण करें।।
गाइए निज गान में।
राष्ट्र के सम्मान में।।
वंदना इसकी करें।
प्रार्थना इससे करें।।
अंत में इससे मिले।
पुष्प श्रद्धा के खिले।।
वीरता हो संग में।
राष्ट्र माटी रंग में।।
केसरी हो शान से।
रक्त के बलिदान से।।
हो चमन मेरा हरा।
प्रेम चित में हो भरा।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978
0 Likes
