Girindra Mohan Jha

विकसित भारत गिरींद्र मोहन झाविकसित भारत गिरींद्र मोहन झा

0 Comments 12:50 pm

विकसित भारत हमारे देश भारत का ऐसा होगा रूप, विश्व भर में यह रहा है, रहेगा सदा अनूप, सड़कें, बिजली,[...]

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नीला आसमान – आशीष अम्बरनीला आसमान – आशीष अम्बर

0 Comments 12:39 pm

कविता शीर्षक :- नीला आसमान देखो , कितना प्यारा लगता, नीला – नीला आसमान । चमचम चमकें चाँद – सितारे,[...]

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लोड़ीलोड़ी

0 Comments 9:51 am

लोड़ी सोजा मेरा मुन्ना राजा सुनाऊँ मैं कहानी…. तेरे सपनों में आएगी परियों की रानी …… आजा निंदिया तू चुपके-से[...]

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चलो रे साथी चलो चलोचलो रे साथी चलो चलो

0 Comments 9:47 am

चलो रे साथी चलो चलो… चलो चलो स्कूल चलो… चलो रे साथी चलो चलो… चलो चलो स्कूल चलो… उठाओ बस्ता[...]

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शिक्षकशिक्षक

0 Comments 9:46 am

आओ खेलें खेल,चलगी अब अपनी रेल पढ़ें और लिखेंगे, बनेंगे महान हमको भी तब जानेगा सारा जगत महान करते रहेंगे[...]

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शिक्षक बनना आसान नहीं शिक्षक बनना आसान नहीं 

0 Comments 9:42 am

  शिक्षक बनना आसान नहीं खुद को तरासना पड़ता है नन्हें हीरे को तरासने के लिए…..   थके हुए बदन[...]

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लट्टूवा के नाचलट्टूवा के नाच

0 Comments 9:42 am

लट्टूवा के नाच (बाल कविता) लट्टूवा घुम-घुम घूमेला, धरती पर रंग बनावे। ना थकाला, ना रुक जाला, सबके मनवा बहलावे।[...]

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