मुझे तिरंगा माँ दिलवा दो- राम किशोर पाठक

मुझे तिरंगा माँ दिलवा दो- रासा छंद बाल कविता मुझे तिरंगा माँ दिलवा दो।वैसा ही कुर्ता सिलवा दो।। भैया संग मुझे भी जाना।ध्वज मुझको भी है फहराना।। मैं भी वहाँ…

जब से आई बसंती शाम- नीतू रानी

ठंडी हवा लिए आईमेरी बसंती शाम,इससे प्रभावित हो रहादेश, विदेश और गाम। बसंत पंचमी पर्व परआई बसंती शाम,थोड़ी ठंडी बढ़ गईलोगों को हुआ जुकाम‌। लोगों को हुआ जुकाम‌चिकित्सक के पास…

खामोशी रुचिका

खामोशी जब बोलना बेअसर होने लगे तो रास आने लगी खामोशी। खामोशी जो थी अपने में समेटे न जाने कितनी बातें कितने अरमान,कितनी चाहतें कितनी शिकायतें,कितनी मोहब्बतें। ख़ामोशी सदा ही…

गणतंत्र दिवस का उल्लास रामकिशोर पाठक

गणतंत्र दिवस का उल्लास- सरसी छंद गीत जब सबमें है उत्साह भरा, आ जाओ जी पास। ध्वज अपना फहराकर हम-सब, पाएँ कुछ उल्लास।। भला सभी का जिससे होता, वैसा हो…

बागेश्वरी मां -रामपाल प्रसाद सिंह

हरि गीतिका छंद बागेश्वरी माॅं श्वेतपद्ममा,ज्ञानदा या भारती। आकार सबके एक जिनकी,हम उतारे आरती।। शुभ भोर सुंदर पूर्व से ही,देव जागे हैं यहाॅं। दिनकर सजाकर रश्मियाॅं पर,संग भागे हैं यहाॅं।।…

स्वर की देवी सरस्वती-नीतू रानी

कमल आसन पर बैसल छथि, स्वर की देवी सरस्वती। माँ हँस वाहिनी ज्ञान दायिनी, विद्या दायिनी सरस्वती। कमल आसन पर बैसल छथि, स्वर की देवी सरस्वती। मांँ स्वेत वस्त्र धारिनी…

टीओबी वर्षगांठ-नीतू रानी

हे बहिना छीयै टीओबी के  सातवाँ वर्षगांठ हे, गेबै मंगलगान हे ना। देबै सगरे नोत हकार घर -घर स्थापना दिवस केअ करबै प्रचार, हे बहिना दीप प्रज्ज्वलित कैर मनेबै सातवाँ…