प्यारी लीची-कार्तिक कुमारप्यारी लीची-कार्तिक कुमार

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तू है मीठी, रस से भरी, प्यारी-प्यारी लीची, गर्मी में ठंडक पहुँचाती, सबको लगती अच्छी। हरे पत्तों के बीच चमकती,[...]

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Ram Kishore Pathak

वंदन करिए सुभग अवधेश को रामकिशोर पाठकवंदन करिए सुभग अवधेश को रामकिशोर पाठक

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वंदन करिए सुभग अवधेश को- विजया/मनोरमा छंद गीत वंदन करिए सुभग अवधेश को। संग विराजे सुता मिथिलेश को।। भव-भंजन सुख-दायक[...]

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हर सांस जिससे थी जुड़ी – कुमकुम कुमारीहर सांस जिससे थी जुड़ी – कुमकुम कुमारी

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संयुत छंद (वार्णिक मापनी-112 121 121 2) गणावली-सलगा जभान जभान गा हर साँस थी जिससे जुड़ी। मुख मोड़ वो मुझसे[...]

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