माँ माँ! सुंदर ! बहुत सुंदर, शब्द ब्रम्ह समाया , अंतस्थ अन्तर्मन रोम रोम, स्पंदन समर्पण सुंदर सुरभित चितवन! माँ![...]
राधे राधे -रामकिशोर पाठकराधे राधे -रामकिशोर पाठक
राधे-राधे- माया छंद गीत वर्णिक २२२-२, २११-२२१-१२२ राधे-राधे, जो जन गाते रहते हैं। गोपाला को, नित्य सखा जो कहते हैं।।[...]
आतप रामकिशोर पाठकआतप रामकिशोर पाठक
आतप- रोला छंद गीत आतप से हलकान, हुए अब जन है सारे। बहुत बनें नादान, समझ कब पाए प्यारे।। तरुवर[...]
मजदूर की मजबूरी बिंदु अग्रवालमजदूर की मजबूरी बिंदु अग्रवाल
मजदूर की मजबूरी वो चल पड़ा अपने कर्म के पथ पर लिए अपने हुनर का नूर, अपने घर परिवार से[...]
मजदूर -मनु कुमारीमजदूर -मनु कुमारी
मजदूर कभी चिमनियों में ईंट बनाते, कभी ईंट वह स्वयं बन जाते। कभी कारखानों , उद्योगों की, श्रम अग्नि में[...]
बेचारा मजदूर -नीतू रानीबेचारा मजदूर -नीतू रानी
शीर्षक – बेचारा मजदूर। * बेचारा मजदूर दिनभर करता मजदूरी, परिवार से रहता दूर,बेचारा मजदूर। कभी खेत में काम है[...]
तुम्हे देखकर अंकुरित प्रणय -रामकिशोर पाठकतुम्हे देखकर अंकुरित प्रणय -रामकिशोर पाठक
तुम्हें देखकर अंकुरित प्रणय- गीत तुम्हें देखकर अंकुरित प्रणय। होता स्पंदित है नित्य निलय।। यौवन अंगराई आज अजब। फैलाई जुल्फें[...]
नयन कटारी -रामकिशोर पाठकनयन कटारी -रामकिशोर पाठक
नयन कटारी- मानस छंद गीत वर्णिक १११-१२२, २११-११२ नयन कटारी, यौवन तन के। विकल निगोड़ी, पायल खनके।। मृदुल लता सी,[...]
शिव भजन -गिरींद्र मोहन झाशिव भजन -गिरींद्र मोहन झा
शिव भजन शिव शिव हर हर जपो निरंतर । साम्ब सदाशिव शम्भो महेश्वर ।। ओं हर हर हर महादेव-2 नीलकण्ठ[...]
भजन से परम धाम पाइए – राम किशोर पाठक भजन से परम धाम पाइए – राम किशोर पाठक
सहज नाम बस राम गाइए। भजन से परम धाम पाइए।। सहज पाप करते हुए कभी। हृदय ताप धरते हुए कभी।।[...]
