जीवन का क्या मोल है – महाचण्डिका छंद गीत सुख की इच्छा में फँसा, विवश हुआ वह मौन है। जीवन[...]
मुंशी प्रेमचंद विलक्षणता के प्रतीक – अमरनाथ त्रिवेदीमुंशी प्रेमचंद विलक्षणता के प्रतीक – अमरनाथ त्रिवेदी
मुंशी प्रेमचंद विलक्षणता के प्रतीक कौन भूल सकता है प्रेमचंद को , जिनकी मार्मिक इतनी कृति है । ग्राम्य जीवन[...]
जीवन – गिरींद्र मोहन झाजीवन – गिरींद्र मोहन झा
जीवन दिन और वर्ष की तरह ही होता है जीवन, दिन में सूर्य उदित होते अरुणिमा के संग, सुबह का[...]
कलम का सिपाही- मुक्तक – राम किशोर पाठककलम का सिपाही- मुक्तक – राम किशोर पाठक
कलम का सिपाही- मुक्तक कलम का कोई सिपाही है कहा। मुफलिसी आटा गिला करता रहा।। चाँद तारे रौशनी करते रहें।[...]
बदलता परिवेशबदलता परिवेश
-: बदलता परिवेश :- हमने देखा था…. बिलखते हुए बचपन को कूड़ा बीनते हुए, पटरियों के किनारे हमउम्रों से निवाला[...]
स्व. सुषमा स्वराजस्व. सुषमा स्वराज
भारत की यशस्वी युग नेत्री ,आजातशत्रु, ओजस्विनी ममतामयी ,विदुषी स्व.सुषमा स्वराज जी को पूण्य तिथि पर भाव भीनी श्रद्धांजलि! सुषमा[...]
श्रावणी पर्व -रत्ना प्रियाश्रावणी पर्व -रत्ना प्रिया
श्रावणी पर्व श्रावणी पर्व है अति पावन, मिलकर सभी मनाएँ, रक्षाबंधन के धागे यह महत्व हमें समझाएँ । शिव की[...]
नाता अटूट है – गिरींद्र मोहन झानाता अटूट है – गिरींद्र मोहन झा
नाता अटूट है- बहन और भाई, रेशम का धागा औ’ भाई की कलाई, बहन के लिए क्या-क्या सौगातें आयीं, प्रेम[...]
भाई बहना संग में- महाधरणी छंद गीत- राम किशोर पाठकभाई बहना संग में- महाधरणी छंद गीत- राम किशोर पाठक
भाई बहना संग में- महाधरणी छंद गीत महिमा जिसकी गा रहे, लाया वह मनुहार है। प्रेम भरा अनुराग ले, आया[...]
रक्षा -बंधनरक्षा -बंधन
रक्षा- बंधन जाते-जाते सावन ने भाइयों को पास बुलाया है, बहनों ने भी नेह प्रेम से रक्षा -सूत्र बनाया है।[...]
