है मान बाकी – शिखंडिनी छंद किसे हम कहें, बातें पुरानी। रहा कुछ नहीं, बाकी कहानी।। जिन्हें सुबह से, ढूँढा[...]
सरहद पे खड़े हैं जज्बा लेकर- बिंदु अग्रवालसरहद पे खड़े हैं जज्बा लेकर- बिंदु अग्रवाल
सरहद पे खड़े हैं लेकर जज्बा बलिदान का सरहद पे खड़े हैं लेकर जज्बा बलिदान का।देश की आन पे करते[...]
पितृपक्ष के भाव- अमरनाथ त्रिवेदीपितृपक्ष के भाव- अमरनाथ त्रिवेदी
पितृ पक्ष के भाव जिनमें है पिता की भक्ति ,वही तो पितृ तर्पण करते ।अपने उर में श्रद्धा लेकर ,वही [...]
जाति वर्ण – गिरींद्र मोहन झाजाति वर्ण – गिरींद्र मोहन झा
भिन्न-भिन्न जाति, सम्प्रदाय,भिन्न-भिन्न वर्ण और समुदाय,भाषा, राज्य, प्रांत और वतन,भिन्नता सबमें, पर है एक धरम,भिन्न-भिन्न भले सबकुछ, सब असमान,पर एक[...]
युग का प्रभाव- जैनेन्द्र प्रसाद रवियुग का प्रभाव- जैनेन्द्र प्रसाद रवि
गुरुजनों की भी नहीं,छूते हैं चरण कभी,कहीं दूर जाने वक्त, कहते हैं गुड-वाय। बड़ों को प्रणाम हेतुजोड़ते हैं हाथ नहीं,एक[...]
वंदनवार सजे शारदा – कुंडलिया छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’वंदनवार सजे शारदा – कुंडलिया छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
पेड़ लगा मां के नाम से, होंगे जग में नाम। उनके ही नेपथ्य में, पाना चिर विश्राम।। पाना चिर विश्राम,[...]
अब भी यूं रुका क्यों है -डॉ स्नेहलता द्विवेदीअब भी यूं रुका क्यों है -डॉ स्नेहलता द्विवेदी
तू अब भी यूँ रुका क्यूँ है? गुलाब कांटों से यूँ लगा क्यूँ है ? जिंदगी तेरा ये फ़लसफ़ा क्यूँ[...]
देश हमारा -राम किशोर पाठकदेश हमारा -राम किशोर पाठक
देश हमारा हरपल आगे। भारत वासी जब-जब जागे।। आदर देते हम-सब आएँ। भारत माँ की जय-जय गाएँ।। देव यहीं भूतल[...]
पेड़- गिरीन्द्र मोहन झापेड़- गिरीन्द्र मोहन झा
पेड़ बीज को अंकुरित होने में भी लगता है संघर्ष, पौधे धीरे-धीरे बढ़कर हो जाते हैं पेड़, यह पतझड़-वसंत-ग्रीष्म-वृष्टि-शीत, सबको[...]
महामानव -जैनेंद्र प्रसादमहामानव -जैनेंद्र प्रसाद
महामानव पाकर भी ऊँचा पद- मिलता नहीं है यश, कई ऐसे गुमनाम, होते हैं यहांँ इंसान। घर से निकल कर-[...]
