Amarnath Trivedi

खुशी-खुशी हम पढ़ने जाएँ- अमरनाथ त्रिवेदीखुशी-खुशी हम पढ़ने जाएँ- अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 1:11 pm

खुशी खुशी हम पढ़ने जाएँ खुशी खुशी हम पढ़ने   जाएँ, ध्यान से हम सब ज्ञान भी पाएँ। टोली बनाकर स्कूल[...]

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सच हो जाएँ सारे सपने – राम किशोर पाठकसच हो जाएँ सारे सपने – राम किशोर पाठक

0 Comments 1:10 pm

सच हो जाएँ सारे सपने मुस्कान सजाकर होंठों पर, हरपल को जीना हम सीखें। आओं अपने कर्मों से अब, हम-सब[...]

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Amarnath Trivedi

आओ बच्चों खेलें खेल – अमरनाथ त्रिवेदीआओ बच्चों खेलें खेल – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 10:22 pm

आओ बच्चों खेलें खेल आओ   बच्चों   खेलें    खेल , सब  बच्चों  से  कर  लें  मेल । खेलकूद हमेशा  संयम  से  [...]

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आऍं गुरु से तिलक लगा लें- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान ‘आऍं गुरु से तिलक लगा लें- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान ‘

0 Comments 10:20 pm

आऍं गुरु से तिलक लगा लें आऍं गुरु से तिलक लगा लें, काली छाया दूर भगा लें, बीत गई गर्मी[...]

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अपना हमें समर्पण दे दो- राम किशोर पाठकअपना हमें समर्पण दे दो- राम किशोर पाठक

0 Comments 10:17 pm

अपना हमें समर्पण दे दो – बाल कविता कूद कूदकर आते बच्चे। कुछ सहमें इठलाते बच्चे।। कहना चाह रहे कुछ[...]

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Amarnath Trivedi

प्रभु हम तुम्हें भुला न पाएँ – अमरनाथ त्रिवेदीप्रभु हम तुम्हें भुला न पाएँ – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 9:44 pm

प्रभु हम तुम्हें भुला न पाएँ सारी    उमरिया   जीवन   की , प्रभुजी  यूँ  ही  बीत   न जाए , कण कण[...]

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गुरुवर वाले प्रेम से – अवतार छंद गीतिका- राम किशोर पाठकगुरुवर वाले प्रेम से – अवतार छंद गीतिका- राम किशोर पाठक

0 Comments 9:42 pm

गुरुवर वाले प्रेम से – अवतार छंद गीतिका झूम रहे सब संग में, कुछ आज कीजिए। गुरुवर वाले प्रेम से,[...]

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Amarnath Trivedi

हे रामभक्त अंजनी नंदन- अमरनाथ त्रिवेदीहे रामभक्त अंजनी नंदन- अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 4:45 am

हे रामभक्त अंजनी नंदन हे रामभक्त   अंजनी  नंदन । हे अमित बल के तू निधान । तुम्हीं   तो   दुखहर्त्ता [...]

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घट-घट वासी शिव संन्यासी – सरसी छंद गीत – राम किशोर पाठकघट-घट वासी शिव संन्यासी – सरसी छंद गीत – राम किशोर पाठक

0 Comments 4:42 am

घट-घट वासी शिव संन्यासी – सरसी छंद गीत बैठे हैं भस्म लगा कैलाशी, करते बेड़ा पार। घट-घट वासी शिव संन्यासी,[...]

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समय – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान ‘समय – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान ‘

0 Comments 4:41 am

समय/काल दोहे समय नहीं है छोड़ता,चाहे हो बलवान। युग आए ठहरे नहीं,थोड़े दिन की शान।। समय परख सज्जन चले,दुर्जन खोए[...]

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