Snehlata

दहेज -डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’दहेज -डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

0 Comments 7:18 pm

माँ के भला कोख़ में क्यों मरती बेटियाँ, जन्म लेती नमक क्यों हैं चखती बेटियाँ। समाज के दरिंदों तुम आवाज़[...]

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Manu Raman Chetna

मानवता का हित करें – मनु कुमारीमानवता का हित करें – मनु कुमारी

0 Comments 7:16 pm

(दोहा छंद) मानवता का हित करें, चलें नेम आचार। दीन दुखी से प्रेम हो, करिये पर उपकार।। क्रोध अगर कोई[...]

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ram किशोर

जानकी नवमी – राम किशोर पाठकजानकी नवमी – राम किशोर पाठक

0 Comments 4:25 am

जनक के राज्य में ऐसा भयंकर ग्रीष्म आया था। सरोवर, खेत सूखे थें, नहीं कोई हल चलाया था।। किया था[...]

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Mrityunjaya

अलख जगाना है – मृत्युंजय कुमारअलख जगाना है – मृत्युंजय कुमार

0 Comments 4:23 am

नन्हें-मुन्हें बच्चों में शिक्षा का अलख जगाना है। राष्ट्र- निर्माता होने का अपना फर्ज निभाना है।। समाज के दबे-पिछड़ों को[...]

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Suresh-kumar-gaurav

आलोचना एवं समालोचना – सुरेश कुमार गौरवआलोचना एवं समालोचना – सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 4:18 am

आलोचना सत्य हो, रहे उचित आधार, मन को चोट दे नहीं, बोले मधुर विचार। कटु वाणी की धार से, न[...]

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आदमी और जंगल- संजय कुमारआदमी और जंगल- संजय कुमार

0 Comments 6:13 pm

बूढ़ा बरगद रो-रोकर, यूं मुझसे कहने लगा! क्या बिगाड़ा था? क्या बिगाड़ा था हमने? कि तुम और तुम्हारी जात ने,[...]

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Nutan

टीचर्स ऑफ बिहार- नूतन कुमारीटीचर्स ऑफ बिहार- नूतन कुमारी

0 Comments 6:10 pm

व्याख्या कैसे करुँ तेरा, विस्तार तेरा है सीमित नहीं। टीओबी है टीम अनूठा, उदाहरण से वर्णन किंचित नहीं।। पद्य पंकज[...]

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ram किशोर

हस्त प्रक्षालनम्- राम किशोर पाठकहस्त प्रक्षालनम्- राम किशोर पाठक

0 Comments 6:08 pm

हस्त प्रक्षालनम्, हस्त प्रक्षालनम्! फेनकम्, घर्षणम्, हस्तौ घर्षणम्। हस्तयो: पृष्टाभ्याम् घर्षणम्।। अंगुल ग्रास घर्षणम्। जलेन सर्व प्रक्षालनम्! हस्त प्रक्षालनम्! पूर्वे[...]

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Amarnath Trivedi

शिक्षक ज्ञान के दीपक -अमरनाथ त्रिवेदीशिक्षक ज्ञान के दीपक -अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 6:07 pm

हम  शिक्षक ज्ञान के दीपक हैं , सदा ज्ञान का प्रकाश फैलाते। कथनी करनी में भेद नहीं , जीवन का[...]

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Snehlata

माँ सम्पूर्ण ब्रह्म -स्नेहलता द्विवेदी “आर्यामाँ सम्पूर्ण ब्रह्म -स्नेहलता द्विवेदी “आर्या

0 Comments 6:04 pm

माँ! शब्द नही ब्रह्म! संतति का सर्वस्व! निर्मल मोहक सौंदर्य! माँ! अद्भुत आनंद! धरा का स्वर्ग। सृष्टि में अतुल्य! माँ![...]

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