मकर संक्रांति-बैकुंठ बिहारी

आया मकर संक्रांति का पर्व, जो बनाता संतुलन प्रकृति के साथ, संतुलन सूर्योपासना के साथ, संतुलन मानव जीवन के साथ। आया मकर संक्रांति का पर्व, जो जाना जाता है विभिन्न…

कहर-रामपाल प्रसाद सिंह “अनजान”

गजब शीत काया। बदन काट खाया।। अब कहाॅं सवेरा?। अरुण का बसेरा।। कनकनी चढ़ी है। थरथरी बढ़ी है।। सुबह शाम कैसा! लहर एक जैसा।। पिक निवास सोई। मधुर प्रीति खोई।।…

मैं पतंग हूँ मुझे उड़ने दो आकाश में-नीतू रानी

मैं पतंग हूँ मुझे उड़ने दो  खुले नीले आकाश में, मेरे पैरों में धागा न बाँधना  नही तो गिर जाउंगा मझधार में। अभी मैं हूँ बहुत हीं छोटा  मैं हूँ…

जीवन दर्शन-मनु कुमारी

यह जीवन बड़ा अनमोल है, इसे व्यर्थ न गँवाया करो। सुख-दुःख इसमें समाए हुए हैं, इनसे कभी न घबराया करो। सुख-दुःख तो जीवन में आते हैं और जाते हैं, यदि…

बाल-विवाह – रत्ना प्रिया

बाल-विवाह – रत्ना प्रिया ब्याह नहीं कोमल कलियों का फूलों-सा खिल जाने दो, बचपन, शिक्षा और यौवन को, मंजिल तो मिल जाने दो ।   वरदानरूप मिला यह जीवन, बने…