मिट्टी से सुंदर रूप बनाएँ। नई-नई कलाएँ अपनाएँ। हाथी, घोड़ा, फूल बनाएँ। गुड़िया, दीपक खूब सजाएँ। छोटे-छोटे खिलौने गढ़ें। मिलकर[...]
कचरा पृथक्करण- कार्तिक कुमारकचरा पृथक्करण- कार्तिक कुमार
गीला-सूखा कचरा बाँटें। स्वच्छता की राह को थामें। हरा डिब्बा, नीला डिब्बा। सही जगह पर डालें कचरा। प्लास्टिक अलग, कागज़[...]
अहंकार की दुर्गन्धअहंकार की दुर्गन्ध
अहंकार की दुर्गंध पैसा, पावर घूम-घूमकर, सबके माथे चूम रहा है. जिसे छू लिया इसने, उसका मन ही झूम रहा[...]
“ज्ञानी ककहरा “-संतोष कुमार“ज्ञानी ककहरा “-संतोष कुमार
क से कबूतर हम पढ़ते हैं, ख से खरगोश है, उजला – उजला, ग से गमला में पौधे लगाना, घ[...]
“पहली कक्षा के बच्चे” कविता“पहली कक्षा के बच्चे” कविता
पहली कक्षा के बच्चे, दिखते भोले- भाले, होते मन के सच्चे । पहली कक्षा के बच्चे, पहली कक्षा के बच्चे[...]
शिक्षक तुम सृजन हो-कार्तिक कुमारशिक्षक तुम सृजन हो-कार्तिक कुमार
शिक्षक तुम सृजन हो, ज्ञान की अमर निशानी हो, शिक्षक तुम विनाश की अकथ कहानी हो। अज्ञान के अंधेरों का[...]
“एक आह” – स्मिता ठाकुर“एक आह” – स्मिता ठाकुर
मन ने चाहा बस इतना, कोई अपना इतने पास रहे। दो मीठे से बोल कहे, थोड़ा-सा विश्वास रहे। लेकिन सूनी[...]
गाय-कार्तिक कुमारगाय-कार्तिक कुमार
गाय हमारी माता है, सबसे प्यारी, सबसे न्यारी। दूध, दही और घी देकर, करती जीवन की रखवाली। सीधी-सादी, शांत स्वभाव[...]
सूरज:कार्तिक कुमारसूरज:कार्तिक कुमार
सूरज पहला जीवनदाता, जग में लाता नया प्रकाश।सूरज दूसरा आशा बनकर, भर देता मन में उल्लास।पहली किरण जग को जगाती,[...]
एक छोटा बच्चा था-कार्तिक कुमारएक छोटा बच्चा था-कार्तिक कुमार
एक छोटा बच्चा था, मन से बड़ा सच्चा था। नन्हे-नन्हे उसके सपने, आँखों में उजियारा था। मीठी उसकी प्यारी बोली,[...]
