आज की नारी -रुचिका

आज की नारी अपने घावों से खुद ही उबरती, संघर्ष की जमीन पर एक नई पटकथा लिखती है वह आज की नारी जो नित नए आयाम को गढ़ती। दोहरी जिम्मेदारी…

दहलीज -रुचिका

दहलीज हर बार वह सोचती की अब नही, मगर कदम उसके ठहर जाते थे घर की दहलीज पर घुटती रहती थी मगर हिम्मत नही जुटा पाती थी की छू ले…

नारी शक्ति – मुन्नी कुमारी

नारी-शक्ति स्व-रचित-कविता नारी की शक्ति अपार, नारी की महिमा अपरम्पार। नारी में गुणों का भंडार, नारी में ममता की बहार। कभी माँ की ममता बहाती, कभी बहन बन प्यार लुटाती।…

करूणा की धारा – मनु कुमारी

ममता की मूरत है वो, करूणा की निर्मल धारा है। मां ,बहन ,पत्नी ,सखी रूप में,रिश्तों की बगिया को संवारा है। रात- रात भर जागके जिसने,निज संतति को पाला है।…

बस इतना देना-मधु कुमारी

सृष्टि के निर्माण में  जो साझेदारी कर सकती है  अपना छोड़  जो सबकी हितकारी बन सकती है  जो हंसकर  अपमान भरे विष प्याला भी पी सकती है  हर चुनौती का…

वंदनीय होता है हर-पल, नारी का हर रूप-राम किशोर पाठक

वंदनीय होता है हर-पल, नारी का हर रूप। उसके सारे रूप निराले, लगते बड़े अनूप।। धीरज धरती सा रखती हैं, पर्वत सा विश्वास। नदियों जैसी बहती हर-पल, लेकर सदा मिठास।।…

बेटियाँ-आशीष अम्बर

बेटियाँ दोनों कुल की मर्यादा है, उनसे ही होता कुल का वैभव । उसी के वश में सृजन सृष्टि है, रहती हरदम सबके लिए सुलभ । खेलकूद में भी बेटियों…

मैं नारी हूं -ब्यूटी कुमारी 

प्रकृति की अनुपम छवि है नारी,  सहनशील वसुंधरा, चंदा सी उजियारी शारदा की वीणा, मां दुर्गा की कटारी,  मैं अवतारी हूं, हां मैं नारी हूं । उपवन की शोभा फुलवारी, …

नारी तूँ नारायणी-नीतू रानी

नारी तूँ नारायणी तुम हो शिव की अर्द्धांगिनी, तुम्हीं हो कृष्ण की राधा रानी तुम्हीं हो घर की महारानी, तुम हो सबका दुःख हारिनी तुम्हीं हो साक्षात लक्ष्मी नारायणी, नारी…