बच्चों तुम स्कूल जाओ चाहे कोई काम पर कभी नहीं खाली पेट, निकलो तूं घर से। सुबह में काम करो[...]
महाराणा प्रताप – नीतू रानीमहाराणा प्रताप – नीतू रानी
” महाराणा प्रताप की खुद्दारी भारत माता की पूँजी है, ये वो धरती है जहांँ कभी चेतक की टापें गूँजी[...]
मित्रता – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मित्रता – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
द्वारिका में मिलने को, सुदामा जी आए जब, चरण पखारें श्याम, पानी ले परात में। मित्र कहो समाचार, पूछा जब[...]
मनहरण घनाक्षरी – एस.के.पूनममनहरण घनाक्षरी – एस.के.पूनम
विछोह की पीड़ा सहे, नयन तो भींग रहे, हृदय संतप्त कर,संग छोड़ आए थे। तप्त धरा पग बिंध, सजल अँखियाँ[...]
मां और धूप – मनु कुमारीमां और धूप – मनु कुमारी
मां और धूप ये तपती धूप, याद दिलाती है मुझे, मेरे बचपन की। मेरी मां कभी -कभी नंगे पांव दौड़कर[...]
अनजान रिश्ते- नीतू रानीअनजान रिश्ते- नीतू रानी
अनजान रिश्ते जल्द रिश्तों में बदल गए, न कभी देखा न कभी जाना हाय दैया रिश्ते में मेरे पति बन[...]
वे मुस्काते फूल नहीं – मनीष कुमार शशिवे मुस्काते फूल नहीं – मनीष कुमार शशि
वे मुस्काते फूल, नहीं जिनको आता है मुर्झाना, वे तारों के दीप, नहीं जिनको भाता है बुझ जाना; वे नीलम[...]
माँ का आंचल – रत्ना प्रियामाँ का आंचल – रत्ना प्रिया
चाहता हूँ मैं रोज मुझे माँ ,लोरी गा के सुनाए | माँ की लोरी , माँ का आंचल , माँ[...]
माॅ॑ – नीतू रानीमाॅ॑ – नीतू रानी
पितु सु माता सौ गुणा सुत को राखै प्यार , मन सेती सेवन करै तन सु डाॅ॑ट अरु गारि। इसका[...]
मनहरण घनाक्षरी- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’मनहरण घनाक्षरी- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
वृक्ष पुत्र के समान, रखें सभी नित्य ध्यान, शुद्ध वायु प्राप्त होती, बड़े-बड़े काम हैं। पत्ते हैं गुणकारक, छाया तो[...]
