दृढ़ विश्वास के प्रतीक प्रेम का पर्व है यह रक्षाबंधन ,
रक्षा का संकल्प निराला भाई-बहन का पर्व पावन ।
युगों-युगों से यह संस्कृति परंपरा निभाती आई ,
संस्कृति के मनोरम सुगंध से विश्वधरा महकायी ,
बालाएँ असुरक्षित न समझें सुवातावरण हो ऐसा ,
हर गली हर मोड़ पर मौजूद रक्षक हो भाई जैसा ,
आर्यावर्त्त का शाश्वत स्नेह महक उठे बनकर चंदन ।
रक्षा का संकल्प निराला भाई-बहन का पर्व पावन ।
विजय-तिलक धारी यह मस्तक ऊँचा भाल सदा रखना ,
दुश्मन के छक्के छुड़ाना हार का स्वाद नहीं चखना ,
भारती के लाल हो भैया , माँ-बहन की रखना लाज ,
देशप्रेम की राह चलकर आज सँवारो परहित काज ,
त्याग , शौर्य की गाथा से गौरवशाली माँ का आँगन ।
रक्षा का संकल्प निराला भाई-बहन का पर्व पावन ।
मँहगे उपहार में ज्यादा प्यार , इसे तुच्छ सदा जानो ,
निश्चल हृदय का अटूट प्रेम अमूल्य है सदा मानो ,
बचपन की कोमल कल्पना , आओ पुनः सहेजें हम ,
नोंक-झोंक और शरारतें , घर-आँगन में खोजें हम ,
स्वयं हारकर मुझे जिताना स्नेह-भाव का शत् वंदन ।
रक्षा का संकल्प निराला भाई-बहन का पर्व पावन ।
रत्ना प्रिया – शिक्षिका (11 – 12)
उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर
चंडी ,नालंदा

