पद्यपंकज Bhawna,Festival रक्षाबंधन- रत्ना प्रिया

रक्षाबंधन- रत्ना प्रिया


Ratna Priya

दृढ़ विश्वास के प्रतीक प्रेम का पर्व है यह रक्षाबंधन ,

रक्षा का संकल्प निराला भाई-बहन का पर्व पावन ।

युगों-युगों से यह संस्कृति परंपरा निभाती आई ,

संस्कृति के मनोरम सुगंध से विश्वधरा महकायी ,

बालाएँ असुरक्षित न समझें सुवातावरण हो ऐसा ,

हर गली हर मोड़ पर मौजूद रक्षक हो भाई जैसा ,

आर्यावर्त्त का शाश्वत स्नेह महक उठे बनकर चंदन ।

रक्षा का संकल्प निराला भाई-बहन का पर्व पावन ।

विजय-तिलक धारी यह मस्तक ऊँचा भाल सदा रखना ,

दुश्मन के छक्के छुड़ाना हार का स्वाद नहीं चखना ,

भारती के लाल हो भैया , माँ-बहन की रखना लाज ,

देशप्रेम की राह चलकर आज सँवारो परहित काज ,

त्याग , शौर्य की गाथा से गौरवशाली माँ का आँगन ।

रक्षा का संकल्प निराला भाई-बहन का पर्व पावन ।

मँहगे उपहार में ज्यादा प्यार , इसे तुच्छ सदा जानो ,

निश्चल हृदय का अटूट प्रेम अमूल्य है सदा मानो ,

बचपन की कोमल कल्पना , आओ पुनः सहेजें हम ,

नोंक-झोंक और शरारतें , घर-आँगन में खोजें हम ,

स्वयं हारकर मुझे जिताना स्नेह-भाव का शत् वंदन ।

रक्षा का संकल्प निराला भाई-बहन का पर्व पावन ।

रत्ना प्रिया – शिक्षिका (11 – 12)    

उच्च माध्यमिक विद्यालय माधोपुर    

चंडी ,नालंदा

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