होली के उत्साह में -रामकिशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

होली के उत्साह में- दोहा छंद गीत

होली के उत्साह में, मैंने पी ली भंग।
शाम ढले घर भूलकर, मिला पड़ोसन संग।। जोगीरा सर ररर

गोरा मुखड़ा देखकर, मैंने मला गुलाल।
प्रेम पड़ोसन का मिला, बाँह गले में डाल।।
तभी पड़ोसी आ गये, करने मुझसे जंग।
होली के उत्साह में, मैंने पी ली भंग।।०१।। जोगीरा सरररर

समझा घरनी निज सखा, करिए नही बवाल।
भाग वहाँ से मैं चला, करने लगा मलाल।।
वह भी पीछे दौड़ता, देख हुआ मैं दंग।
होली के उत्साह में, मैंने पी ली भंग।।०२।।जोगीरा सरररर

हुआ चकित घर पर पहुँच, घरनी पूरी लाल।
वही पड़ोसी रंग था, रहा प्रेम से डाल।।
बुरा न मानो कह दिया, होली भरे उमंग।
होली के उत्साह में, मैंने पी ली भंग।।०३।।जोगीरा सरररर
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

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