महागौरी – सरसी छंद गीत
आज अष्टमी तिथि अति पावन, चलिए माँ के द्वार।
मातु महागौरी है करती, भक्तों का उद्धार।।
चार भुजाओं वाली माता, श्वेत वसन शुभ रंग।
श्वेत वृषभ वाहन पर चलती, शोभित अद्भुत अंग।।
कर त्रिशूल डमरू को रखती, शक्ति सौम्य सुख सार।
मातु महागौरी है करती, भक्तों का उद्धार।।०१।।
संग अभय वर मुद्रा कर में, देती सबको शांति।
गौर वर्ण तन आभूषण से, धारे अद्भुत कांति।।
अष्ट वर्ष की कन्या जैसे, मोहक हर व्यवहार।
मातु महागौरी है करती, भक्तों का उद्धार।।०२।।
पूजन करना क्षमता जैसी, पूर्ण करें हर आस।
कष्ट हरण कर सुख है देती, रखता जो विश्वास।।
शीश नवाऊँ मातु चरण में, करना माँ उपकार।
मातु महागौरी है करती, भक्तों का उद्धार।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

