किरदार- सरसी छंद आधारित गीत
पावन भूतल धरा धाम यह, हम सबका आधार।
रंगमंच सा मंचन करते, यहाँ सभी किरदार।।
जिसको जितना साँस मिला है, उतना उसका पाठ।
अपने-अपने हिस्से में सब, लिए फूल या काठ।।
अभिनय सबके अलग-अलग हैं, अलग सभी व्यवहार।
रंगमंच सा मंचन करते, यहाँ सभी किरदार।।०१।।
अपने-अपने कर्मो से सब, निभा रहे निज धर्म।
गौरव से कोई भर देता, तो कोई दे शर्म।।
कोई प्यार लुटाता हर-पल, कोई दे दुत्कार।
रंगमंच सा मंचन करते, यहाँ सभी किरदार।।०२।।
मंचन करना ही जीवन है, फिर आता है अंत।
खोये भौतिकता में सारे, जब-तक मिले अनंत।।
ईश्वर ने सबको दे डाला, मंच सजा संसार।
रंगमंच सा मंचन करते, यहाँ सभी किरदार।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८

