पद्यपंकज Uncategorized मंगल रामपाल प्रसाद सिंह

मंगल रामपाल प्रसाद सिंह


RAMPAL SINGH ANJAN

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मनहर घनाक्षरी।

मंगल

नीले-नीले नभ नीचे,हरियाली नैन खींचे,
मटर की छिमियों में,स्वाद बलवान है।

सर्षप के आसपास,अलसी बसी है खास,
नीली-नीली ऑंखवाली,तारे के समान हैं।

बौने-बौने मसूरी में,लाल लहू दाने भरे,
खेतिहर समंगल,कर रहे दान है।

कोयल ने छेड़ी राग,सृष्टि ही गई है जाग,
भौंरे के गुंजार ताक,धीना धीन गान है।

रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
मध्य विद्यालय दरवेभदौर

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