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सद्भाव की दीपावली – सुबाला कुमारी
सब मिलकर एक दीप जलाएं
अपने अन्तर्मन की द्वेष मिटाए
निर्बलों, असहायों को आस जगाएं
इस दीपावली ज्ञान की दीप जलाएं।
अंधकार जो फैला है हर ओर
लाये नव आशा का सुंदर भोर
भेदभाव का भाव मिटा कर आज
रचें एकता का नया समाज।
सच्ची खुशियां तब ही आएगी
जब हँसी हर चेहरे पर छाएगी
दुख दर्द किसी का बांट सके हम
ऐसे दीपक घर-घर जलाएं हम।
केवल तेल बाती का यह त्यौहार नहीं
प्रेम बिना जीवन में कोई सार नहीं
सत्य दया और करुणा को अपनाए
सद्भाव का सुंदर संदेश फैलाएं।
अज्ञान का हर कोना रोशन कर दें
सबके जीवन में नई उद्वेलन भर दें
मिलकर गाएं सब खुशियों का गान
दीप जलाकर बढ़ाएं भारत की शान।
सुबाला कुमारी
शिक्षिका हिन्दी
भागलपुर बिहार।

