पद्यपंकज sandeshparak शब्द की शक्ति-कुमकुम कुमारी

शब्द की शक्ति-कुमकुम कुमारी



शब्द की शक्ति

शब्द की शक्ति है अपार
जिसे चाहे डुबा दे मझधार
जिसे चाहे बना दे अवतार
शब्द की शक्ति है अपार।

शब्द चाहे तो पानी में आग लगा दे
शब्द चाहे तो गगन से अमृत बरसा दे
शब्द से बड़ा कोई अस्त्र नहीं
इससे बड़ा कोई शस्त्र नहीं।

शब्द ही केशव को द्रोपदी के निकट लाया
शब्द ही शिशुपाल को यमलोक पहुँचाया
शब्द चाहे तो महाभारत करा दे
शब्द चाहे तो किसी को राज दिला दे।

शब्द चाहे तो तन बदन में आग लगा दे
शब्द चाहे तो मृतप्राय को जीना सिखा दे
देखो शब्द की शक्ति कैसी है निराली
कौवे औऱ कोयल में कितनी भेद कर डाली।

शब्द चाहे तो गैरों को अपना बना ले
शब्द चाहे तो अपनों को दूर करा दे
शब्द चाहे तो बना बनाया खेल बिगाड़ दे
शब्द चाहे तो बिगड़े सारे काज बना दे।

अतः सोच-समझकर शब्दों का करो चयन
किसी का दिल न दुखे ऐसा करो प्रवचन
क्योंकि शब्दों ने ही किसी का घर उजड़ा है
औऱ शब्दों ने ही किसी के सुने संसार को संवारा है।

शब्द की शक्ति है अपार
जिसे चाहे डुबा दे मझधार
जिसे चाहे बना दे अवतार
शब्द की शक्ति है अपार।

कुमकुम कुमारी
मध्य विद्यालय बाँक
जमालपुर, मुंगेर

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