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जीवन का मर्म – कुमकुम कुमारी”काव्याकृति”जीवन का मर्म – कुमकुम कुमारी”काव्याकृति”

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भूलकर भेदभाव,दिल में हो समभाव, जीभ पर रहे सुधा,प्रेम रस पीजिए। होठों पर मुस्कान हो,गम का न निशान हो, मीठे[...]

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