कर्त्तव्यपरायण और व्यवहारकुशल बनें हम,
सदा-सर्वदा स्वयं के प्रति ईमानदार बनें हम,
जीना इसी का नाम है।
प्रगति पथ पर, सतत बढ़ते रहे, चलते रहे,
जरूरत पड़ने पर मदद दूसरों की करते रहे,
जीना इसी का नाम है ।
सदा खुश रहें, हंसते और हंसाते रहे,
शुभ और श्रेष्ठ कार्यों में जीवन बिताते रहे,
जीना इसी का नाम है ।
सर्वोत्तम के लिए सदा प्रयासरत रहे,
विषम परिस्थितियों के लिए उद्यत रहे,
जीना इसी का नाम है ।
उच्च जीवन-मूल्य, उच्च संस्कारयुक्त सदा,
पर साधारण, सहज हो अमूल्य जीवन सदा,
जीना इसी का नाम है ।
स्वयं जीवन जीएं, परोपकार करें, दृढ़नियमी और कृतज्ञ बनें,
विषय-क्षेत्र, कार्य-क्षेत्र, पर्यावरण-क्षेत्र, परिवार, समाज, राष्ट्र को क्या दे सकें हम,
यह सद्भावना नित निरंतर पनपती रहे,
जीना इसी का नाम है ।
महान कार्यों में स्वयं को निमित्त मानें, और कार्य कर यश प्राप्त करते रहें
ईश्वर में आस्था, स्थितप्रज्ञ और स्वयं में स्थित होकर नित निरंतर कार्य करते रहें,
जीना इसी का नाम है।
कर्त्तव्य कभी आग और पानी की परवाह नहीं करता; कर्त्तव्य पालन में ही चित्त की शांति है, ध्यान रखें,
नित्य-निरंतर अपना कर्त्तव्य कुशलतापूर्वक पालन करते रहें ।
जीना इसी का नाम है।
धैर्य, धर्म, साहस कभी न हारें, अपना आत्मबल सदा संभालें,
सुख-दुख, जीत-हार में समान रहकर निरंतर चलें, निरंतर बढ़ें।
गिरीन्द्र मोहन झा

