अवध बिहारी – कुसुमविचित्रा छंद गीत – राम किशोर पाठक भव भय हारी, प्रभु अवतारी। जनहित कारी, अवध बिहारी।। जगत सताए, समझ न पाऊँ। हर-पल कैसे, सरस बनाऊँ।। नमन करूँ…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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