Tag: गेह चहचहाती बेटियाँ

बेटियाँ- गिरीन्द्र मोहन झाबेटियाँ- गिरीन्द्र मोहन झा

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धन्य वह गेह, जहाँ खिलखिलाती हैं बेटियाँ, धन्य वह गेह, जहाँ चहचहाती हैं बेटियाँ, धर्म-ग्रंथ कहते हैं, गृह-लक्ष्मी होती बहु-बेटियाँ,[...]

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