Tag: जैनेन्द्र प्रसाद “रवि”

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शिक्षा का उद्देश्य – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’शिक्षा का उद्देश्य – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 4:28 pm

पढ़ने से ज्ञान मिले दुनिया में मान मिले, जीवन से अज्ञान का मिटता है अंधकार। किए पर खेद करें किसी[...]

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पानी से जिंदगानी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’पानी से जिंदगानी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 4:26 pm

बरखा के आस करके थकलय नयनमा,किसनमा। कि खेतिए पर निर्भर हय सबके परनमा किसनमा।। जेठ, बैसाख बितल, बितलय असढ़वा, बिना[...]

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सारा जग परिवार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’सारा जग परिवार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 10:29 pm

गर्म-गर्म हवा चली, झुलस रही है डाली, फल-फूल-पत्ते बिना, वृक्ष ये बेकार हैं। माझी बिना मझधार- नैया डोले डगमग, दरिया[...]

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दहेज रूपी दानव – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’दहेज रूपी दानव – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 10:35 pm

देश से विदेश तक, धरती अम्बर तक, सभी जगह बेटियां , छोड़ रही आज छाप। बेटियों को बेटा मान,लालन पालन[...]

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मुंह का निवाला – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मुंह का निवाला – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:11 pm

मुंह का निवाला गरीबों को दुनिया में, सिर पर छत नहीं, हमेशा अभाव में ही कटता जीवन है। थक जाती[...]

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मौसम का असर – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम का असर – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 4:14 pm

रात दिन में भी ज्यादा- पड़ता है फर्क नहीं, ज़ालिम मौसम देखो, ढा रहा कहर है। जैसे -जैसे दिन ढले,[...]

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राधा की सहेलियां – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’राधा की सहेलियां – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 8:16 am

मनहरण घनाक्षरी छंद राधा को चिढाती आज, खुशी की बताओ राज, रोज करें आपस में खूब अठखेलियाँ। कुछ नहीं बोलती[...]

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उपदेश देते हैं – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’उपदेश देते हैं – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 7:48 pm

विषय:-उपदेश देते हैं विद्या :-मनहरण घनाक्षरी छंद फैशन में पड़कर, सुध-बुध खोते युवा, चेहरा नकली और काले केश होते हैं।[...]

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बेटी की सफलता – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बेटी की सफलता – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 7:47 pm

माता की दुलारी बेटी, दुनिया में न्यारी बेटी, आसमान छूने का ये, तरीका नायाब है। खतरों से खेल कर, दबावों[...]

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लहराईं परचम – जैनेन्द्र प्रसाद रविलहराईं परचम – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 7:45 pm

लहराईं परचम, दिखलाई दमखम, आज हमारे देश को, बेटियों पे नाज है। रही नहीं छुई-मुई, देखो कामयाब हुई, एक बार[...]

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