Tag: जैनेन्द्र प्रसाद “रवि”

Jainendra Prasad Ravi

चलो हम दर्शन करें – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’चलो हम दर्शन करें – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 1:56 pm

आज आएंगे अवधपुरी राम, चलो हम दर्शन करें, अलौकिक सजी है अयोध्या धाम, चलो हम दर्शन करें।। ले हाथों में[...]

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Jainendra Prasad Ravi

प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 1:52 pm

सनातन पर नाज रूप घनाक्षरी छंद “”””””””””””””””””” पाँच सौ वर्षों के बाद वनवास काटकर, राम रघुवर मेरे अवध में आए[...]

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Jainendra Prasad Ravi

रघुवर सरकार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’रघुवर सरकार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 7:54 pm

जग के पालनहार रघुवर सरकार, हमारे आराध्य देव राम भगवान हैं। दीनों पे अकारण हीं करूणा हैं बरसाते, उनके सेवक[...]

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राम रमैया – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’राम रमैया – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 8:09 pm

आज घर-घर में बाजे बधैया हो, अइलन राम रमैया। राजा लूटावैं अन्न-धन सोनमा, रानी लुटावैं रूपैया हो,अइलन राम रमैया।। देख[...]

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Jainendra Prasad Ravi

राजा राम – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’राजा राम – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 8:20 pm

सजी है अवधपुरी नवेली दुल्हन जैसी, सिंहासन बिराजेंगे, सबके दुलारे राम। संत-भक्त-साधकों का सपना साकार हुआ, बैठे थे वे सदियों[...]

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Jainendra

जीवन का आधार – जैनेन्द्र प्रसाद रविजीवन का आधार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 1:07 pm

धर्म बिना नर ऐसे जैसे अश्व रास बिना, लोगों के जीवन का धर्म ही आधार है। जीवन सफर में जो[...]

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Jainendra

प्रेम भरी वाणी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रेम भरी वाणी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 7:10 pm

ठोस परिणाम हेतु काम आता अनुभव, बीमारों को पथ्य वास्ते, चावल पुरानी हो। जीवन में सोच कर कदम बढ़ाएं सदा,[...]

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Jainendra

ठंड का प्रकोप- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’ठंड का प्रकोप- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 7:07 pm

पशु पक्षी सरीसर्प बैठे हैं दुबक कर, आज आधा भारत है शीत की आगोश में। कड़ाके की ठंडक से हाथ[...]

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Jainendra

प्रेम उपहार-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रेम उपहार-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 7:02 pm

मनहरण घनाक्षरी छंद सबकी बनाए भाल चौबीस का नया साल, साथियों के लिए लाए, खुशियां अपार है। आप सभी छोटे[...]

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Jainendra Prasad Ravi

झूठी शान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’झूठी शान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 3:32 pm

जब कोई बेसहारा पाता हो सहारा नहीं, दिखावे को महलों में रखते हैं बाँध स्वान। सोने हेतु काफी होता दो[...]

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