Tag: देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

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प्रेरणा गीत: सीखो – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्रेरणा गीत: सीखो – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 9:35 pm

प्रतिदिन अपनी माँ से सीखो करुणा को बरसाना। प्रेम-भाव से सिक्त हृदय में सौम्य सुमन महकाना।। अनुशासन चींटी बतलाती गुण[...]

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दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 7:40 pm

हिंदी अमरतरंगिनी, जन-जन की है आस। सच्चे उर जो मानते, रहती उनके पास।। हिंदी भाषा है मधुर, देती सौम्य मिठास।[...]

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दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 6:12 pm

भारत देश महान है, पावन जिसका नाम। ज्ञान-चक्षु से देखिए, निर्मल है अभिराम।। आजादी का अर्थ यह, करें देश-हित काज।[...]

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कुंडलिया – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’कुंडलिया – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 6:33 pm

आया सावन झूमकर, हर्षित हुए किसान। ‌हरी-भरी यह भूमि हो, यही हमारी आन।। यही हमारी आन, सदा गुण ऊर्जा भरिए।[...]

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दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 9:44 pm

दीप जलाकर ज्ञान का, करिए गुरु का गान। चरण शरण रहकर सदा, तजिए निज अभिमान।। गुरुवर प्रतिदिन शिष्य को, देते[...]

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फूल – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’फूल – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 9:41 pm

लगते कितने पुष्प अभिराम गहरा चिंतन कर लो मानव। फूलों-सा नित बनिए ललाम करो नष्ट मत बनकर दानव।। फूल प्रकृति[...]

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श्रावण- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’श्रावण- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 9:38 pm

शुचि मन-भावन श्रावण आया आगत को लख हों पुलकित मन। अम्बर बादल चहुँदिशि छाया। दृश्य मनोहर बरसा-सावन।। कृषक मुदित मन[...]

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दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 2:19 pm

दीप जलाकर ज्ञान का, करिए गुरु का गान। चरण शरण रहकर सदा, तजिए निज अभिमान।। गुरुवर प्रतिदिन शिष्य को, देते[...]

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बरसात – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’बरसात – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 10:27 pm

काली घटा व्योम में छाई दृश्य देख मन मुदित कीजिए। हँसती हुई बरसात आई हस्त उठाकर तोय पीजिए।। वर्षा देखो[...]

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प्राची की लाली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्राची की लाली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 2:59 pm

प्राची की सुंदर छवि लाली सबको नित संदेश सुनाती। जगो-उठो दो-पा खुशहाली पुरखों से पाई यह थाती।। रश्मि सूर्य की[...]

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