पाषाण में परमात्मा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर जब गोकुल पर मँडराया संकट, इंद्र का कोप अपार था, तब श्रीकृष्ण ने[...]
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ध्वनि एक, अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरध्वनि एक, अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
ध्वनि एक, अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर सुनने और पढ़ने में जो, लगते एक समान। पर अर्थों की दृष्टि[...]
अविराम’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरअविराम’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
‘अविराम’ – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर थक चुका है यह तन, पर सांस अभी विस्मित है, हर पग पर मिल रही,[...]
काव्य-मुहावरा मंजरी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरकाव्य-मुहावरा मंजरी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
काव्य-मुहावरा मंजरी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर यहाँ हिंदी के कुछ प्रसिद्ध मुहावरों और लोकोक्तियों को काव्य (कविता) के रूप में[...]
दशहरे का दिव्य पंछी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरदशहरे का दिव्य पंछी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
दशहरे का दिव्य पंछी – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर कंठ नीला, रूप सुंदर, शिव का ही वो वास है, दशहरे के[...]
शाश्वत नियम – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरशाश्वत नियम – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
शाश्वत नियम – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर शिखर पर बैठ ओ पथिक! तनिक तू किसपे इतराता? बनाकर काँच के भवनों को,[...]
काव्य का आभूषण: अलंकार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरकाव्य का आभूषण: अलंकार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
काव्य का आभूषण: अलंकार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर शब्दों का जब चमत्कार हो, कविता की बढ़ती शान। भाषा सुंदर रूप[...]
विश्वास और घाव – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरविश्वास और घाव – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
विश्वास और घाव – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर कमी किसी ने भी नहीं छोड़ी, हमें आजमाने में, शेष कुछ न रहा[...]
स्वयं की खोज – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरस्वयं की खोज – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
स्वयं की खोज – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर जो मैं कभी था ही नहीं… कभी क्षमा नहीं करूँगा मैं उन चेहरों[...]
वाक्य भेद – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर वाक्य भेद – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
वाक्य भेद – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर पदों के सार्थक मेल से, ‘वाक्य’ जनम लेता है, भावों और विचारों को, जो[...]
