स्वावलंबी :- धर्मेंद्र कुमार ठाकुर जब भी था कठिनता का घेरा, मैंने हर गिरते को उठाया। उनके दर्दों को[...]
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चेहरों का मेला(भ्रम):-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर चेहरों का मेला(भ्रम):-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
चेहरों का मेला(भ्रम):-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर घृणा नहीं है किसी से, न कोई शिकायत है, बस इस स्वार्थी संसार की एक[...]
रस-वृक्ष (काव्य रूप) :- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुररस-वृक्ष (काव्य रूप) :- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
रस-वृक्ष (काव्य रूप) :- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर हृदय-भूमि पर उगा हुआ है, एक अनूठा रस का वृक्ष, काव्य-जगत का गौरव[...]
छंद-शास्त्र का सार:- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर छंद-शास्त्र का सार:- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
छंद-शास्त्र का सार:- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर यहाँ मेरे द्वारा दी गई छंद शास्त्र की जानकारी को सरल, लयबद्ध और गेय[...]
मौन और अनुभव :- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरमौन और अनुभव :- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
मौन और अनुभव :- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर चलो अब जाने भी दो क्या करोगे कथा सुनकर, ये चोट जो गहरी[...]
पथ अपना अपना – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरपथ अपना अपना – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
पथ अपना अपना – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर जीवन के इस महासमर में, कोटि-कोटि राही चलते हैं, सबके अपने-अपने पथ हैं,[...]
वर्णमाला बोध काव्य – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरवर्णमाला बोध काव्य – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
वर्णमाला-बोध काव्य- धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर कमल ‘क’ से विकसित हो मन में, पढ़ो निरंतर पल-पल तुम, खिसके जब खरगोश ‘ख’[...]
भिक्षुक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरभिक्षुक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
भिक्षुक – धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर कहते हैं लोग यहाँ अब न कोई दरिद्र रहा, सबकी तिजोरी भर गई, कोई न[...]
छुटकारा पाना है-धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरछुटकारा पाना है-धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
छुटकारा पाना है आओ आज़ादी का पर्व मनाएं घर घर जाकर उत्साह बढ़ाएं कोरोना का टीका लगवाएं आओ आज़ादी का[...]
बदलाव-धर्मेन्द्र कुमार ठाकुरबदलाव-धर्मेन्द्र कुमार ठाकुर
बदलाव हुआ यूँ, समय बदल गया, बचपन बदला, युवा पीढ़ी बदल गया। रहन-सहन बदला, खान-पान बदल गया। रंग बदला, ढंग[...]
