नशे के गर्त में डूब रही है, आज की युवा पीढ़ी। कर्णधार कहलाते देश के, विकास की है जो सीढ़ी। नशे की कालाबाजारी का, धूवाँ घर-घर फैला। तन मैला,मन भी…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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